स्मृतियाँ

आदित्य रहबरआदित्य रहबर

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जैसे मृत्यु आती है बिन बताए

और ठंडी पड़ जाती है पूरी देह

तुम भी आना

अपनी स्मृतियों में

ठीक उसी तरह

ठंडी पड़ी देह को एक गर्माहट देने

हमें यह भ्रम तोड़ना होगा कि

देह का ठंडा पड़ जाना ही नहीं होता

मृत्यु का मात्र एक कारण।

आदित्य रहबर
About the poet

आदित्य रहबर

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

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