About उद्भ्रान्त
सुपरिचित कवि-लेखक। कविता सहित साहित्य की विभिन्न विधाओं में सौ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। मूल नाम : रमाकांत शर्मा जन्म : 04/09/1948 | झुंझुनू, राजस्थान
Selected Quotes
Poetry & Stories
प्रहरी ओ देश के - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
हिरना कस्तूरी - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
लेकिन यह गीत नहीं - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
स्वयंप्रभा - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
देह चाँदनी - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
About उद्भ्रान्त
सुपरिचित कवि-लेखक। कविता सहित साहित्य की विभिन्न विधाओं में सौ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।
मूल नाम : रमाकांत शर्माजन्म : 04/09/1948 | झुंझुनू, राजस्थान
सुपरिचित कवि-लेखक। कविता सहित साहित्य की विभिन्न विधाओं में सौ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। उद्भ्रान्त was born on 4 September 1948. Associated place: नवलगढ़, राजस्थान. Kavishala has 47 poems and stories by उद्भ्रान्त, free to read on this page, along with selected quotes you can share.उद्भ्रान्त: Quick Answers
Who is उद्भ्रान्त?
When was उद्भ्रान्त born?
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Poems & Stories by उद्भ्रान्त
प्रहरी ओ देश के - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
हिरना कस्तूरी - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
लेकिन यह गीत नहीं - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
स्वयंप्रभा - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
देह चाँदनी - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
पाँखुरी-पाँखुरी - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
समय है झरना - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
शब्दकमल खिला है - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
मैंने यह सोचा न था - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
काली मीनार को ढहाते हुए - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
गंध नहीं है एवं इस शहर में आ गए - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
नाटकतंत्र एवं अन्य कविताएँ - उद्भ्रान्त
मैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।
Selected Quotes by उद्भ्रान्त (चुनिंदा उद्धरण)
सीता रसोईसीता की रसोई मेंकठपुतली का खेल देखनामेरे बचपन के दिनों कामैं चलता मेरे साथ नया सावन चलता है,मैं चलता मेरे साथ नया जीवन चलता है।जाड़े की धूप उमड़ आईठिठुर रहीमेरी हर कृतिमेरी पुत्री है;मिट्टी को जल से गूँथऔर आग से तपाकरVideos on उद्भ्रान्त
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