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इज़्हार-ए-जुनूँ बर-सर-ए-बाज़ार हुआ है - तनवीर अंजुम
इज़्हार-ए-जुनूँ बर-सर-ए-बाज़ार हुआ हैदिल दस्त-ए-तमन्ना का गिरफ़्तार हुआ
कभी बहुत है कभी ध्यान तेरा कुछ कम है - तनवीर अंजुम
कभी बहुत है कभी ध्यान तेरा कुछ कम हैकभी हवा है कभी आँधियों का मौसम है
कभी वो मिस्ल-ए-गुल मुझे मिसाल-ए-ख़ार चाहिए - तनवीर अंजुम
कभी वो मिस्ल-ए-गुल मुझे मिसाल-ए-ख़ार चाहिएकभी मिज़ाज-ए-मेहरबाँ वफ़ा-शिआर चाहिए
किस तरह उस को बुलाऊँ ख़ाना-ए-बर्बाद में - तनवीर अंजुम
किस तरह उस को बुलाऊँ ख़ाना-ए-बर्बाद मेंदिल तअस्सुर चाहता है बे-सदा फ़रियाद में
तरीक़ कोई न आया मुझे ज़माने का - तनवीर अंजुम
तरीक़ कोई न आया मुझे ज़माने काकि एक सौदा रहा जिंस-ए-दिल लुटाने का
तनवीर अंजुम: Quick Answers
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Poems & Stories by तनवीर अंजुम
इज़्हार-ए-जुनूँ बर-सर-ए-बाज़ार हुआ है - तनवीर अंजुम
इज़्हार-ए-जुनूँ बर-सर-ए-बाज़ार हुआ हैदिल दस्त-ए-तमन्ना का गिरफ़्तार हुआ
कभी बहुत है कभी ध्यान तेरा कुछ कम है - तनवीर अंजुम
कभी बहुत है कभी ध्यान तेरा कुछ कम हैकभी हवा है कभी आँधियों का मौसम है
कभी वो मिस्ल-ए-गुल मुझे मिसाल-ए-ख़ार चाहिए - तनवीर अंजुम
कभी वो मिस्ल-ए-गुल मुझे मिसाल-ए-ख़ार चाहिएकभी मिज़ाज-ए-मेहरबाँ वफ़ा-शिआर चाहिए
किस तरह उस को बुलाऊँ ख़ाना-ए-बर्बाद में - तनवीर अंजुम
किस तरह उस को बुलाऊँ ख़ाना-ए-बर्बाद मेंदिल तअस्सुर चाहता है बे-सदा फ़रियाद में
तरीक़ कोई न आया मुझे ज़माने का - तनवीर अंजुम
तरीक़ कोई न आया मुझे ज़माने काकि एक सौदा रहा जिंस-ए-दिल लुटाने का
दुखों के रूप बहुत और सुखों के ख़्वाब बहुत - तनवीर अंजुम
दुखों के रूप बहुत और सुखों के ख़्वाब बहुततिरा करम है बहुत पर मिरे अज़ाब बहुत
बस्तियाँ तो आसमाँ ले जाएँगे - तनवीर अंजुम
बस्तियाँ तो आसमाँ ले जाएँगेये समुंदर किस किनारे जाएँगेे
लम्हा-ए-इमकान को पहलू बदलते देखना - तनवीर अंजुम
लम्हा-ए-इमकान को पहलू बदलते देखनाआतिश-ए-बे-रंग में ख़ुद को पिघलते देखना
शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं - तनवीर अंजुम
शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैंफिर लोग मेरे अंदर सुनसान हो गए हैं
सूरज सारा शहर डराता रहता है - तनवीर अंजुम
सूरज सारा शहर डराता रहता हैपथरीली सड़कों पे दरिया प्यासा है
तन्हाई के फ़न में कामयाब - तनवीर अंजुम
अपनी अज़ली आरज़ू के मुताबिक़मैं बिल्कुल आज़ाद हो चुकी हूँ
छोटी सी खिड़की है - तनवीर अंजुम
छोटी सी दीवार कीछोटी सी खिड़की है
Selected Quotes by तनवीर अंजुम (चुनिंदा उद्धरण)
शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं फिर लोग मेरे अंदर सुनसान हो गए हैंदूर तक ये रास्ते ख़ामोश हैं दूर तक हम ख़ुद को सुनते जाएँगेदुखों के रूप बहुत और सुखों के ख़्वाब बहुत तिरा करम है बहुत पर मिरे अज़ाब बहुतइस ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे मुझे नाज़ बहुत है वो शख़्स मिरी जाँ का तलबगार हुआ हैमुझे अज़ीज़ है बे-एहतियाती-ए-सादा न शौक़ है न हुनर उस को आज़माने काटूटी है ये कश्ती तो मिरे साथ सफ़र को वो जान-ए-मसाफ़त मिरा तय्यार हुआ हैCouplets (Sher) by तनवीर अंजुम
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