माई मीठे हरि जू के बोलना ।
पांय पैंजनी रुनझुन बाजे, आंगन आंगन डोलना ॥
काजर तिलक कंठ कचुलामल, पीतांबर को चोलना ।
‘परमानंद दास’ की जीवनी, गोपि झुलावत झोलना ॥
माई मीठे हरि जू के बोलना ।
पांय पैंजनी रुनझुन बाजे, आंगन आंगन डोलना ॥
काजर तिलक कंठ कचुलामल, पीतांबर को चोलना ।
‘परमानंद दास’ की जीवनी, गोपि झुलावत झोलना ॥

Paramanandadas (1493-1583) is a poet in the eight poets (Ashthachap Kavi) of the Vallabh sect (Pushtimarga) who described the various pastimes of Lord Shri Krishna in their own positions. Paramanandadas, who had a prominent place among the poets of Ashtachap,…
View profile & all 28 Poems / Storiesबृंदावन क्यों न भए हम मोर।करत निवास गोबरधन ऊपर, निरखत नंद किशोर।
कौन रसिक है इन बातन कौ।नंद-नंदन बिन कासों कहिये, सुन री सखी मेरो दु:ख या मन कौ।
मैया मोहिं ऐसी दुलहिन भावै।का गोप की तनक ढोठिनियाँ,रुनक झुनक चलि आवै॥
कहा करौ बैकुंठहि जाय?जहाँ नहि नन्द जसोदा गोपी, जहाँ नहीं ग्वाल-बाल और गाय।
श्री लाल कछु कीजे भोजन तिल तिल कारी हों वारी हों।अब जाय बैठो दोउ भैया नंदबाबा की थारी हो॥१॥