Selected Quotes
Poetry & Stories
उड़ने की आरज़ू में हवा से लिपट गया - नुसरत मेहदी
उड़ने की आरज़ू में हवा से लिपट गयापत्ता वो अपनी शाख़ के रिश्तों से कट गया
इश्क़ में मजनूँ-ओ-फ़रहाद नहीं होने के - नुसरत मेहदी
इश्क़ में मजनूँ-ओ-फ़रहाद नहीं होने केये नए लोग हैं बर्बाद नहीं होने के
कतरा के ज़िंदगी से गुज़र जाऊँ क्या करूँ - नुसरत मेहदी
कतरा के ज़िंदगी से गुज़र जाऊँ क्या करूँरुस्वाइयों के ख़ौफ़ से मर जाऊँ क्या करूँ
वो साथ आया तो मेरी उड़ान बैठ गई - नुसरत मेहदी
वो साथ आया तो मेरी उड़ान बैठ गईन जाने क्या हुआ मुझ में थकान बैठ गई
मुझ को तो मश्क़-ए-समाअत है चलो तुम बोलो - नुसरत मेहदी
मुझ को तो मश्क़-ए-समाअत है चलो तुम बोलोतुम को सुनना मिरी आदत है चलो तुम बोलो
नुसरत मेहदी: Quick Answers
When was नुसरत मेहदी born?
नुसरत मेहदी was born on 1 September 1970. Associated place: नगीना, बिजनौर उत्तर प्रदेश.
Where can I read नुसरत मेहदी's poetry?
Kavishala has 51 poems and stories and 4 couplets (sher) by नुसरत मेहदी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by नुसरत मेहदी
उड़ने की आरज़ू में हवा से लिपट गया - नुसरत मेहदी
उड़ने की आरज़ू में हवा से लिपट गयापत्ता वो अपनी शाख़ के रिश्तों से कट गया
इश्क़ में मजनूँ-ओ-फ़रहाद नहीं होने के - नुसरत मेहदी
इश्क़ में मजनूँ-ओ-फ़रहाद नहीं होने केये नए लोग हैं बर्बाद नहीं होने के
कतरा के ज़िंदगी से गुज़र जाऊँ क्या करूँ - नुसरत मेहदी
कतरा के ज़िंदगी से गुज़र जाऊँ क्या करूँरुस्वाइयों के ख़ौफ़ से मर जाऊँ क्या करूँ
वो साथ आया तो मेरी उड़ान बैठ गई - नुसरत मेहदी
वो साथ आया तो मेरी उड़ान बैठ गईन जाने क्या हुआ मुझ में थकान बैठ गई
मुझ को तो मश्क़-ए-समाअत है चलो तुम बोलो - नुसरत मेहदी
मुझ को तो मश्क़-ए-समाअत है चलो तुम बोलोतुम को सुनना मिरी आदत है चलो तुम बोलो
ग़लत-बयानी पे उस की यक़ीं दिखाती रही - नुसरत मेहदी
ग़लत-बयानी पे उस की यक़ीं दिखाती रहीमैं सब समझती रही और मुस्कुराती रही
दर्द सुलगाया गया आँच बढ़ा ली गई है - नुसरत मेहदी
दर्द सुलगाया गया आँच बढ़ा ली गई हैजान ठिठुरे हुए रिश्तों की बचा ली गई है
ये सोचिए कि क्यों हवा पे ज़ोर चल नहीं रहा - नुसरत मेहदी
ये सोचिए कि क्यों हवा पे ज़ोर चल नहीं रहाकिसी भी रुख़ से आप का चराग़ जल नहीं रहा
आप तो इश्क़ में दानाई लिए बैठे हैं - नुसरत मेहदी
आप तो इश्क़ में दानाई लिए बैठे हैंऔर दिवाने हैं कि रुस्वाई लिए बैठे हैं हम
बिखर चुका है तअल्लुक़ कसाओ मुश्किल है - नुसरत मेहदी
बिखर चुका है तअल्लुक़ कसाओ मुश्किल हैचलो हटाओ कि अब रख-रखाव मुश्किल है
रुत ख़िज़ाँ की है और हरी हुई है - नुसरत मेहदी
रुत ख़िज़ाँ की है और हरी हुई हैशाख़-ए-गुल तू तो बावरी हुई है
आप शायद भूल बैठे हैं यहाँ मैं भी तो हूँ - नुसरत मेहदी
आप शायद भूल बैठे हैं यहाँ मैं भी तो हूँइस ज़मीं और आसमाँ के दरमियाँ मैं भी तो हूँ
Selected Quotes by नुसरत मेहदी (चुनिंदा उद्धरण)
आजिज़ी आज है मुमकिन है न हो कल मुझ में इस तरह ऐब निकालो न मुसलसल मुझ मेंफ़ज़ा ये अम्न-ओ-अमाँ की सदा रखें क़ाएम सुनो ये फ़र्ज़ तुम्हारा भी है हमारा भीआज इस अंदाज़ से तुम ने मुझे आवाज़ दी यक-ब-यक मुझ में ख़याल आया कि हाँ मैं भी तो हूँआप शायद भूल बैठे हैं यहाँ मैं भी तो हूँ इस ज़मीं और आसमाँ के दरमियाँ मैं भी तो हूँये सोचिए कि क्यों हवा पे ज़ोर चल नहीं रहाकिसी भी रुख़ से आप का चराग़ जल नहीं रहाउड़ने की आरज़ू में हवा से लिपट गयापत्ता वो अपनी शाख़ के रिश्तों से कट गयाCouplets (Sher) by नुसरत मेहदी
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