Selected Quotes
Poetry & Stories
लिख सकूँ तो - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
पथराई आँखें - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
बातों ही बातों में - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
पहला दिन मेरे आषाढ़ का - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
अपनी तो अपने से अनबन ठनी हुई है - नईम
अपनी तो अपने से अनबन ठनी हुई हैजाने कबसे! कह सकना है मुश्किल थोड़ा-
नईम: Quick Answers
When was नईम born?
नईम was born on 1 September 1935. Associated place: बुन्देलखण्ड का एक गाँव.
When did नईम die?
नईम passed away on 9 September 2009.
Where can I read नईम's poetry?
Kavishala has 36 poems and stories by नईम, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by नईम
लिख सकूँ तो - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
पथराई आँखें - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
बातों ही बातों में - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
पहला दिन मेरे आषाढ़ का - नईम
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) में
अपनी तो अपने से अनबन ठनी हुई है - नईम
अपनी तो अपने से अनबन ठनी हुई हैजाने कबसे! कह सकना है मुश्किल थोड़ा-
हम कहें वो सुनें या फिर वो कहें हम सुनें - नईम
हम कहें वो सुनें या फिर वो कहें हम सुनें,होगा देखना! जब पड़ेंगे दिन छिटक कर दूर-
छोड़ो-छोड़ो चरचे अब ये बहुत पुराने - नईम
छोड़ो छोड़ो चरचे अब ये बहुत पुराने।कब तक इनमें हम रस, रूप, सुगंध तलाशें?
चाहना जागी लगे खाँचा बनाने - नईम
चाहना जागी लगे खाँचा बनाने-समय श्रम। दोनों लगे साँचा बनाने।
खड़े न रह पाये जमकर - नईम
चाहना जागी लगे खाँचा बनाने-समय श्रम। दोनों लगे साँचा बनाने।
बातों का क्या - नईम
बातों का क्या हैबातें तो चलती रहतीं ।
लिखने जैसा - नईम
लिखने जैसा लिख न सका मैंसिकता रहा भाड़ में लेकिन,
पांचों घी में - नईम
लिखने जैसा लिख न सका मैंसिकता रहा भाड़ में लेकिन,
Selected Quotes by नईम (चुनिंदा उद्धरण)
जन्म: एक अप्रैल सन पैंतीस को फतेहपुर (हटा)जिला: दमोह (म.प्र.) मेंअपनी तो अपने से अनबन ठनी हुई हैजाने कबसे! कह सकना है मुश्किल थोड़ा-हम कहें वो सुनें या फिर वो कहें हम सुनें,होगा देखना! जब पड़ेंगे दिन छिटक कर दूर-छोड़ो छोड़ो चरचे अब ये बहुत पुराने।कब तक इनमें हम रस, रूप, सुगंध तलाशें?चाहना जागी लगे खाँचा बनाने-समय श्रम। दोनों लगे साँचा बनाने।बातों का क्या हैबातें तो चलती रहतीं ।Videos on नईम
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