About Khwaja Haider Ali Aatish
Khwaja Haider Ali Aatish (Urdu: خواجہ حَیدر علی آتِش ), (1764–1846) of Lucknow was an Urdu poet. Khwaja Haider Ali Aatish Lakhnawi is one of the giants of Urdu Literature. Aatish and Imam Baksh Nasikh were contemporary poets whose rivalry is well known. Both had hundreds of disciples. The era of Aatish-Nasikh was a g…
Selected Quotes
Poetry & Stories
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्याकहती है तुझ को ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ाएबाना क्या
दहन पर हैं उन के गुमाँ कैसे कैसे
दहन पर हैं उन के गुमाँ कैसे कैसेकलाम आते हैं दरमियाँ कैसे कैसे
ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी है
ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी हैउसी अल्लाह ने मुझ को भी मोहब्बत दी है
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ थाबग़ल में सनम था ख़ुदा मेहरबाँ था
आइना सीना-ए-साहब-नज़राँ है कि जो था
आइना सीना-ए-साहब-नज़राँ है कि जो थाचेहरा-ए-शाहिद-ए-मक़्सूद अयाँ है कि जो था
About Khwaja Haider Ali Aatish
Khwaja Haider Ali Aatish: Quick Answers
Who is Khwaja Haider Ali Aatish?
Khwaja Haider Ali Aatish (Urdu: خواجہ حَیدر علی آتِش ), (1764–1846) of Lucknow was an Urdu poet. Khwaja Haider Ali Aatish Lakhnawi is one of the giants of Urdu Literature.
When was Khwaja Haider Ali Aatish born?
Khwaja Haider Ali Aatish was born on 1 January 1764.
When did Khwaja Haider Ali Aatish die?
Khwaja Haider Ali Aatish passed away on 1 January 1846.
Where can I read Khwaja Haider Ali Aatish's poetry?
Kavishala has 32 poems and stories by Khwaja Haider Ali Aatish, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Khwaja Haider Ali Aatish
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्याकहती है तुझ को ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ाएबाना क्या
दहन पर हैं उन के गुमाँ कैसे कैसे
दहन पर हैं उन के गुमाँ कैसे कैसेकलाम आते हैं दरमियाँ कैसे कैसे
ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी है
ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी हैउसी अल्लाह ने मुझ को भी मोहब्बत दी है
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ थाबग़ल में सनम था ख़ुदा मेहरबाँ था
आइना सीना-ए-साहब-नज़राँ है कि जो था
आइना सीना-ए-साहब-नज़राँ है कि जो थाचेहरा-ए-शाहिद-ए-मक़्सूद अयाँ है कि जो था
तोड़ कर तार-ए-निगह का सिलसिला जाता रहा
तोड़ कर तार-ए-निगह का सिलसिला जाता रहाख़ाक डाल आँखों में मेरी क़ाफ़िला जाता रहा
ना-फ़हमी अपनी पर्दा है दीदार के लिए
ना-फ़हमी अपनी पर्दा है दीदार के लिएवर्ना कोई नक़ाब नहीं यार के लिए
चमन में शब को जो वो शोख़ बे-नक़ाब आया
चमन में शब को जो वो शोख़ बे-नक़ाब आयायक़ीन हो गया शबनम को आफ़्ताब आया
हुस्न-ए-परी इक जल्वा-ए-मस्ताना है उस का
हुस्न-ए-परी इक जल्वा-ए-मस्ताना है उस काहुश्यार वही है कि जो दीवाना है उस का
क्या क्या न रंग तेरे तलबगार ला चुके
क्या क्या न रंग तेरे तलबगार ला चुकेमस्तों को जोश सूफ़ियों को हाल आ चुके
फ़रेब-ए-हुस्न से गब्र-ओ-मुसलमाँ का चलन बिगड़ा
फ़रेब-ए-हुस्न से गब्र-ओ-मुसलमाँ का चलन बिगड़ाख़ुदा की याद भूला शैख़ बुत से बरहमन बिगड़ा
कोई इश्क़ में मुझ से अफ़्ज़ूँ न निकला
कोई इश्क़ में मुझ से अफ़्ज़ूँ न निकलाकभी सामने हो के मजनूँ न निकला
Selected Quotes by Khwaja Haider Ali Aatish (चुनिंदा उद्धरण)
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्याकहती है तुझ को ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ाएबाना क्याक्या क्या न रंग तेरे तलबगार ला चुकेमस्तों को जोश सूफ़ियों को हाल आ चुकेना-फ़हमी अपनी पर्दा है दीदार के लिएवर्ना कोई नक़ाब नहीं यार के लिएदहन पर हैं उन के गुमाँ कैसे कैसेकलाम आते हैं दरमियाँ कैसे कैसेफ़रेब-ए-हुस्न से गब्र-ओ-मुसलमाँ का चलन बिगड़ाख़ुदा की याद भूला शैख़ बुत से बरहमन बिगड़ाहुस्न-ए-परी इक जल्वा-ए-मस्ताना है उस काहुश्यार वही है कि जो दीवाना है उस काVideos on Khwaja Haider Ali Aatish
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