Selected Quotes
Poetry & Stories
आवारा सज्दे - कैफ़ी आज़मी
दोस्तों अब तुम न देखोग ये दिनख़त्म हैं हम पर सितम-आराइयाँ
दूसरा वनवास - कैफ़ी आज़मी
दोस्तों अब तुम न देखोग ये दिनख़त्म हैं हम पर सितम-आराइयाँ
फ़िल्मों के लिए लिखे गीत - कैफ़ी आज़मी
दोस्तों अब तुम न देखोग ये दिनख़त्म हैं हम पर सितम-आराइयाँ
मेरा माज़ी मेरे काँधे पर - कैफ़ी आज़मी
अब तमद्दुन[1] की हो जीत के हारमेरा माज़ी है अभी तक मेरे काँधे पर सवार
कोहरे के खेत - कैफ़ी आज़मी
वो सर्द रात जबकि सफ़र कर रहा था मैंरंगीनियों से जर्फ़-ए-नज़र भर रहा था मैं
कैफ़ी आज़मी: Quick Answers
When was कैफ़ी आज़मी born?
कैफ़ी आज़मी was born on 14 September 1919. Associated place: ग्राम मिज़वाँ, आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत.
When did कैफ़ी आज़मी die?
कैफ़ी आज़मी passed away on 10 September 2002.
Where can I read कैफ़ी आज़मी's poetry?
Kavishala has 66 poems and stories by कैफ़ी आज़मी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by कैफ़ी आज़मी
आवारा सज्दे - कैफ़ी आज़मी
दोस्तों अब तुम न देखोग ये दिनख़त्म हैं हम पर सितम-आराइयाँ
दूसरा वनवास - कैफ़ी आज़मी
दोस्तों अब तुम न देखोग ये दिनख़त्म हैं हम पर सितम-आराइयाँ
फ़िल्मों के लिए लिखे गीत - कैफ़ी आज़मी
दोस्तों अब तुम न देखोग ये दिनख़त्म हैं हम पर सितम-आराइयाँ
मेरा माज़ी मेरे काँधे पर - कैफ़ी आज़मी
अब तमद्दुन[1] की हो जीत के हारमेरा माज़ी है अभी तक मेरे काँधे पर सवार
कोहरे के खेत - कैफ़ी आज़मी
वो सर्द रात जबकि सफ़र कर रहा था मैंरंगीनियों से जर्फ़-ए-नज़र भर रहा था मैं
दोशीज़ा मालन - कैफ़ी आज़मी
लो पौ फटी वो छुप गई तारों की अंजुमनलो जाम-ए-महर से वो छलकने लगी किरन
ताजमहल - कैफ़ी आज़मी
दोस्त ! मैं देख चुका ताजमहल...वापस चल
दूसरा बनबास - कैफ़ी आज़मी
राम बन-बास से जब लौट के घर में आएयाद जंगल बहुत आया जो नगर में आए
तलाश - कैफ़ी आज़मी
ये बुझी सी शाम ये सहमी हुई परछाइयाँख़ून-ए-दिल भी इस फ़ज़ा में रंग भर सकता नहीं
तसव्वुर - कैफ़ी आज़मी
ये किस तरह याद आ रही हो ये ख़्वाब कैसा दिखा रही होकि जैसे सचमुच निगाह के सामने खड़ी मुस्कुरा रही हो
दाएरा - कैफ़ी आज़मी
रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगेफिर वहीं लौट के आ जाता हूँ
नया हुस्न - कैफ़ी आज़मी
कितनी रंगीं है फ़ज़ा कितनी हसीं है दुनियाकितना सरशार है ज़ौक़-ए-चमन-आराई आज
Selected Quotes by कैफ़ी आज़मी (चुनिंदा उद्धरण)
अब तमद्दुन[1] की हो जीत के हारमेरा माज़ी है अभी तक मेरे काँधे पर सवारवो सर्द रात जबकि सफ़र कर रहा था मैंरंगीनियों से जर्फ़-ए-नज़र भर रहा था मैंलो पौ फटी वो छुप गई तारों की अंजुमनलो जाम-ए-महर से वो छलकने लगी किरनदोस्त ! मैं देख चुका ताजमहल...वापस चलराम बन-बास से जब लौट के घर में आएयाद जंगल बहुत आया जो नगर में आएये बुझी सी शाम ये सहमी हुई परछाइयाँख़ून-ए-दिल भी इस फ़ज़ा में रंग भर सकता नहींVideos on कैफ़ी आज़मी
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