परिवर्तन

हरीशचंद्र पांडेहरीशचंद्र पांडे28 Sept 1952

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ज़मीन से उठाऊँगा मैं

एक गिरी पड़ी चीज़

सोना समझकर नहीं

सोना बनाने के लिए

उसे

उठेगी वह

जैसे घोंसले से चिड़िया

जैसे समुद्र से मानसून

जैसे मिट्टी से घास

और फिर गिरेगी वह

जैसे चोंच से तिनका

जैसे बादलों से पानी

जैसे थन से दूध

और मैं आगे बढ़ जाऊँगा...

हरीशचंद्र पांडे
About the poet

हरीशचंद्र पांडे

नवें दशक में सामने आए हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि। अपने काव्य-विषयों, धैर्य और सादगी के लिए उल्लेखनीय मूल नाम : हरीशचंद्र पांडे जन्म : अल्मोड़ा, उत्तराखंड हरीशचंद्र पांडे का जन्म उत्तराखंड से अल्मोड़ा में 28 दिसंबर 1952 को हुआ। अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ से स्कूली शिक…

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