ज़मीन से उठाऊँगा मैं
एक गिरी पड़ी चीज़
सोना समझकर नहीं
सोना बनाने के लिए
उसे
उठेगी वह
जैसे घोंसले से चिड़िया
जैसे समुद्र से मानसून
जैसे मिट्टी से घास
और फिर गिरेगी वह
जैसे चोंच से तिनका
जैसे बादलों से पानी
जैसे थन से दूध
और मैं आगे बढ़ जाऊँगा...
ज़मीन से उठाऊँगा मैं
एक गिरी पड़ी चीज़
सोना समझकर नहीं
सोना बनाने के लिए
उसे
उठेगी वह
जैसे घोंसले से चिड़िया
जैसे समुद्र से मानसून
जैसे मिट्टी से घास
और फिर गिरेगी वह
जैसे चोंच से तिनका
जैसे बादलों से पानी
जैसे थन से दूध
और मैं आगे बढ़ जाऊँगा...

नवें दशक में सामने आए हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि। अपने काव्य-विषयों, धैर्य और सादगी के लिए उल्लेखनीय मूल नाम : हरीशचंद्र पांडे जन्म : अल्मोड़ा, उत्तराखंड हरीशचंद्र पांडे का जन्म उत्तराखंड से अल्मोड़ा में 28 दिसंबर 1952 को हुआ। अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ से स्कूली शिक…
View profile & all 33 Poems / Storiesये अभी-अभी एक घर से बाहर निकले हैंटूट गए रंगीन गुच्छे की तरह
यमुना इलाहाबाद मेंकभी-कभी मुझे यह साफ़ आसमान से काटी गई एक हल्की
देह अपना समय लेती ही हैनिपटाने वाले चाहे जितनी जल्दी में हों
इसे दो कमरे का मकान बनना थाफ़िलहाल एक कमरे के बाद काम बंद है
ट्रक के नीचे आ गया एक आदमीवह अपने बाएँ चल रहा था