क्या कभी मेरा अपना
एक सिर
उगेगा?
मेरे अपने लिए ही जिसमें
ज़हर हो
हाँ, उगेंगी टाँगें ज़रूर
दुलत्ती मार सकूँगा मैं
चलो एक लात ही सही
साफ़ सीधी ठीक बीच में उगी
एक लात से उछलता
कूदता चला जाऊँगा
हाँ, बस एक चिकनी
साफ़-सुंदर गोल खोपड़ी
जिस पे लिखा हो
चाहिए नाक, आँख, कान, मुँह
खोपड़ी फिसलती जाएगी
चट्टानों पर
फिर भी नहीं चलेगा काम
अब खोपड़ी जहाँ पहुँच चुकी
यहाँ से चारों तरफ़
चढ़ाई शुरू होती है।








