तुम बिन

हब्बा ख़ातूनहब्बा ख़ातून

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अनुपम छविवारे, ओ मेरे प्यारे,

ललक रहे हैं

मेंहदी-रचे मेरे हाथ

तुम्हें सहलाने को,

तड़फ रही हूँ

तुम्हारी रतनारी झलक

एक पाने को!

आओ, बुझाओ प्यारे, मेरी अबुझ प्यास

कैसे कटें तुम बिन ये बंजर दिवस-मास!

हब्बा ख़ातून
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हब्बा ख़ातून

हब्बा ख़ातून

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