Selected Quotes
Poetry & Stories
चमगीदड़ - गोपालबाई
एक बार पशु और पक्षियों में ठन गयी लड़ाई घोर।चमगीदड़ ने सोचा ‘हूँगा जो जीतेगा उसकी ओर’॥
धोबी और गधा - गोपालबाई
किसी एक धोबी ने कपड़े ले आने ले जाने को।एक गधा पाला, पर उसको देता थोड़ा खाने को॥
भेड़ और भेड़िया - गोपालबाई
नदी किनारे भेड़ खड़ी एक सुख से पीती थी पानी।एक भेड़िये ने लख उसको मन में पाप-बुद्धि ठानी॥
मौत और घसियारा - गोपालबाई
किसी गाँव में इक घसियारा रहता था किसमत का मारा।बेटे-बेटी जोड़ू जाता। कोई न थे, अल्ला से नाता॥
गोपालबाई: Quick Answers
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Poems & Stories by गोपालबाई
चमगीदड़ - गोपालबाई
एक बार पशु और पक्षियों में ठन गयी लड़ाई घोर।चमगीदड़ ने सोचा ‘हूँगा जो जीतेगा उसकी ओर’॥
धोबी और गधा - गोपालबाई
किसी एक धोबी ने कपड़े ले आने ले जाने को।एक गधा पाला, पर उसको देता थोड़ा खाने को॥
भेड़ और भेड़िया - गोपालबाई
नदी किनारे भेड़ खड़ी एक सुख से पीती थी पानी।एक भेड़िये ने लख उसको मन में पाप-बुद्धि ठानी॥
मौत और घसियारा - गोपालबाई
किसी गाँव में इक घसियारा रहता था किसमत का मारा।बेटे-बेटी जोड़ू जाता। कोई न थे, अल्ला से नाता॥
Selected Quotes by गोपालबाई (चुनिंदा उद्धरण)
किसी एक धोबी ने कपड़े ले आने ले जाने को।एक गधा पाला, पर उसको देता थोड़ा खाने को॥एक बार पशु और पक्षियों में ठन गयी लड़ाई घोर।चमगीदड़ ने सोचा ‘हूँगा जो जीतेगा उसकी ओर’॥नदी किनारे भेड़ खड़ी एक सुख से पीती थी पानी।एक भेड़िये ने लख उसको मन में पाप-बुद्धि ठानी॥किसी गाँव में इक घसियारा रहता था किसमत का मारा।बेटे-बेटी जोड़ू जाता। कोई न थे, अल्ला से नाता॥Videos on गोपालबाई
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