Selected Quotes
Poetry & Stories
फूट गये हीरा की बिकानी कनी हाट हाट - गँग
फूट गये हीरा की बिकानी कनी हाट हाट,काहू घाट मोल काहू बाढ़ मोल को लयो।
उझकि झरोखे झाँकि परम नरम प्यारी - गँग
उझकि झरोखे झाँकि परम नरम प्यारी ,नेसुक देखाय मुख दूनो दुख दै गई ।
मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै - गँग
मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै, सुख साज सनेह समोइ रही।सुचि चीकनी चारु चुभी चित में, भरि भौन भरी खुसबोई रही॥
करि कै जु सिंगार अटारी चढी - गँग
करि कै जु सिंगार अटारी चढी, मनि लालन सों हियरा लहक्यो।सब अंग सुबास सुगंध लगाइ कै, बास चँ दिसि को महक्यो॥
लहसुन गाँठ कपूर के नीर में - गँग
लहसुन गाँठ कपूर के नीर में, बार पचासक धोइ मँगाई।केसर के पुट दै दै कै फेरि, सुचंदन बृच्छ की छाँह सुखाई॥
गँग: Quick Answers
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Poems & Stories by गँग
फूट गये हीरा की बिकानी कनी हाट हाट - गँग
फूट गये हीरा की बिकानी कनी हाट हाट,काहू घाट मोल काहू बाढ़ मोल को लयो।
उझकि झरोखे झाँकि परम नरम प्यारी - गँग
उझकि झरोखे झाँकि परम नरम प्यारी ,नेसुक देखाय मुख दूनो दुख दै गई ।
मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै - गँग
मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै, सुख साज सनेह समोइ रही।सुचि चीकनी चारु चुभी चित में, भरि भौन भरी खुसबोई रही॥
करि कै जु सिंगार अटारी चढी - गँग
करि कै जु सिंगार अटारी चढी, मनि लालन सों हियरा लहक्यो।सब अंग सुबास सुगंध लगाइ कै, बास चँ दिसि को महक्यो॥
लहसुन गाँठ कपूर के नीर में - गँग
लहसुन गाँठ कपूर के नीर में, बार पचासक धोइ मँगाई।केसर के पुट दै दै कै फेरि, सुचंदन बृच्छ की छाँह सुखाई॥
रती बिन साधु, रती बिन संत - गँग
रती बिन साधु, रती बिन संत, रती बिन जोग न होय जती को॥रती बिन मात, रती बिन तात, रती बिन मानस लागत फीको।
अब तौ गुनियाँ दुनियाँ को भजै - गँग
अब तौ गुनियाँ दुनियाँ को भजै, सिर बाँधत पोट अटब्बर की॥कवि गंग तो एक गोविंद भजै, कुछ संक न मानत जब्बर की।
चकित भँवरि रहि गयो - गँग
चकित भँवरि रहि गयो, गम नहिं करत कमलवन,अहि फन मनि नहिं लेत, तेज नहिं बहत पवन वन।
बैठी थी सखिन संग - गँग
बैठी थी सखिन सँग,पिय को गवन सुन्यौ ,सुख के समूह में बियोग आगि भरकी.
झुकत कृपान मयदान ज्यों - गँग
झुकत कृपान मयदान ज्यों उदोत भान,एकन ते एक मान सुषमा जरद की.
देखत कै वृच्छन में - गँग
देखत कै वृच्छन में दीरघ सुभायमान,कीर चल्यो चाखिबे को प्रेम जिय जग्यो है.
तारों के तेज में चन्द्र छिपे नहीं - गँग
तारों के तेज में चन्द्र छिपे नहींसूरज छिपे नहीं बादल छायो
Selected Quotes by गँग (चुनिंदा उद्धरण)
फूट गये हीरा की बिकानी कनी हाट हाट,काहू घाट मोल काहू बाढ़ मोल को लयो।उझकि झरोखे झाँकि परम नरम प्यारी ,नेसुक देखाय मुख दूनो दुख दै गई ।मृगनैनी की पीठ पै बेनी लसै, सुख साज सनेह समोइ रही।सुचि चीकनी चारु चुभी चित में, भरि भौन भरी खुसबोई रही॥करि कै जु सिंगार अटारी चढी, मनि लालन सों हियरा लहक्यो।सब अंग सुबास सुगंध लगाइ कै, बास चँ दिसि को महक्यो॥लहसुन गाँठ कपूर के नीर में, बार पचासक धोइ मँगाई।केसर के पुट दै दै कै फेरि, सुचंदन बृच्छ की छाँह सुखाई॥रती बिन साधु, रती बिन संत, रती बिन जोग न होय जती को॥रती बिन मात, रती बिन तात, रती बिन मानस लागत फीको।Videos on गँग
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