देवल आशीष, poet
Sootradhar · Author

देवल आशीष

देवल आशीष

21 September 1971लखनऊ, उत्तर प्रदेश

  • 7 Poems & Stories
  • 86.4K Reads

Selected Quotes

विश्व को मोहमई महिमा के असंख्य स्वरुप दिखा गया कान्हासारथी तो कभी प्रेमी बना, तो कभी गुरु-धर्म निभा गया कान्हा
— देवल आशीष
Read full
लगती हो रात में प्रभात की किरन-सीकिरन से कोमल कपास की छुअन-सी
— देवल आशीष
Read full

Poetry & Stories

  1. कान्हा - देवल आशीष

    विश्व को मोहमई महिमा के असंख्य स्वरुप दिखा गया कान्हासारथी तो कभी प्रेमी बना, तो कभी गुरु-धर्म निभा गया कान्हा

    4 min read · 12.3K reads
  2. प्यार कर लो प्रिय - देवल आशीष

    लगती हो रात में प्रभात की किरन-सीकिरन से कोमल कपास की छुअन-सी

    7 min read · 12.3K reads
  3. हम अंधेरों को दूर करते हैं - देवल आशीष

    हम अंधेरों को दूर करते हैंअपनी ग़ज़लों से नूर करते हैं

    2 min read · 12.3K reads
  4. मन दहक जाएगा - देवल आशीष

    मुस्कुरा कर मुझे यूँ न देखा करोमृगशिरा-सा मेरा मन दहक जाएगा

    4 min read · 12.3K reads
  5. अक्षर-अक्षर चूम लिया (कविता) - देवल आशीष

    प्रिये तुम्हारी सुधि को मैंने यूँ भी अक्सर चूम लियातुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर-अक्षर चूम लिया

    3 min read · 12.3K reads

More Poetry & Stories You May Like