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Poetry & Stories
कान्हा - देवल आशीष
विश्व को मोहमई महिमा के असंख्य स्वरुप दिखा गया कान्हासारथी तो कभी प्रेमी बना, तो कभी गुरु-धर्म निभा गया कान्हा
प्यार कर लो प्रिय - देवल आशीष
लगती हो रात में प्रभात की किरन-सीकिरन से कोमल कपास की छुअन-सी
हम अंधेरों को दूर करते हैं - देवल आशीष
हम अंधेरों को दूर करते हैंअपनी ग़ज़लों से नूर करते हैं
मन दहक जाएगा - देवल आशीष
मुस्कुरा कर मुझे यूँ न देखा करोमृगशिरा-सा मेरा मन दहक जाएगा
अक्षर-अक्षर चूम लिया (कविता) - देवल आशीष
प्रिये तुम्हारी सुधि को मैंने यूँ भी अक्सर चूम लियातुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर-अक्षर चूम लिया
देवल आशीष: Quick Answers
When was देवल आशीष born?
देवल आशीष was born on 21 September 1971. Associated place: लखनऊ, उत्तर प्रदेश.
Where can I read देवल आशीष's poetry?
Kavishala has 7 poems and stories by देवल आशीष, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by देवल आशीष
कान्हा - देवल आशीष
विश्व को मोहमई महिमा के असंख्य स्वरुप दिखा गया कान्हासारथी तो कभी प्रेमी बना, तो कभी गुरु-धर्म निभा गया कान्हा
प्यार कर लो प्रिय - देवल आशीष
लगती हो रात में प्रभात की किरन-सीकिरन से कोमल कपास की छुअन-सी
हम अंधेरों को दूर करते हैं - देवल आशीष
हम अंधेरों को दूर करते हैंअपनी ग़ज़लों से नूर करते हैं
मन दहक जाएगा - देवल आशीष
मुस्कुरा कर मुझे यूँ न देखा करोमृगशिरा-सा मेरा मन दहक जाएगा
अक्षर-अक्षर चूम लिया (कविता) - देवल आशीष
प्रिये तुम्हारी सुधि को मैंने यूँ भी अक्सर चूम लियातुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर-अक्षर चूम लिया
राधा - देवल आशीष
गोपियाँ गोकुल में थीं अनेक परन्तु गोपाल को भा गई राधाबांध के पाश में नाग-नथैया को, काम-विजेता बना गई राधा
बस मुझ पर एहसान तुम्हारा हो जाए - देवल आशीष
कि तुम सुमनों की कोमलता, कि तुम हिरनी की चंचलताकि तुम कलियों की तरूणाईत्, तुम तुलसी की चौपाई
Selected Quotes by देवल आशीष (चुनिंदा उद्धरण)
विश्व को मोहमई महिमा के असंख्य स्वरुप दिखा गया कान्हासारथी तो कभी प्रेमी बना, तो कभी गुरु-धर्म निभा गया कान्हालगती हो रात में प्रभात की किरन-सीकिरन से कोमल कपास की छुअन-सीहम अंधेरों को दूर करते हैंअपनी ग़ज़लों से नूर करते हैंमुस्कुरा कर मुझे यूँ न देखा करोमृगशिरा-सा मेरा मन दहक जाएगाप्रिये तुम्हारी सुधि को मैंने यूँ भी अक्सर चूम लियातुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर-अक्षर चूम लियागोपियाँ गोकुल में थीं अनेक परन्तु गोपाल को भा गई राधाबांध के पाश में नाग-नथैया को, काम-विजेता बना गई राधाVideos on देवल आशीष
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