छवि, poet
Sootradhar · Author

छवि

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About छवि

तारे भये कारे तेरे नैन रतनारे भये , मोती भये सीरे तू न सीरी अजहूँ भई । छवि कहै पति मै चकैया मिली तू न मिली , ठौया तरु छूटी तेरी टेक ना छुटी दई । अरुनई नई तेरी अरुनई नई भई , चहचही बोली आली तू न बोली ऎबई । मँद छबि भए चँद फूले अरविँद बृँद , गई री विभावरी न रिस रावरी गई । छवि का यह दुर्लभ छन्द श्री राजुल मेहरोत्रा के संग्…

Selected Quotes

तारे भये कारे तेरे नैन रतनारे भये ,मोती भये सीरे तू न सीरी अजहूँ भई ।
— छवि
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उसने मिट्टी को छुआ भर था - प्रताप सोमवंशीपसोपेश में हूँकि कविता चिह्नों में होती है— प्रताप सोमवंशीदर्द औरों का हम - प्रताप सोमवंशीपसोपेश में हूँकि कविता चिह्नों में होती है— प्रताप सोमवंशीये हिज्र का रस्ता है ढलानें नहीं होतींये हिज्र का रस्ता है ढलानें नहीं होतींसहरा में चराग़ों की दुकानें नहीं होतीं— मुनव्वर रानाजुदा रहता हूँ मैं तुझ से तो दिल बे-ताब रहता हैजुदा रहता हूँ मैं तुझ से तो दिल बे-ताब रहता हैचमन से दूर रह के फूल कब शादाब रहता है— मुनव्वर रानाआगगाड़ी आ रही हैएकआगगाड़ी दौड़ती आ रही है। उसका आरव प्रतिध्वनित— ओ. एम. अनुजनक्या रिश्ता रहा भला...क्या रिश्ता रहा भला ज़िंदगी सेठुकरा दिया है जब उसने मुझे!— हब्बा ख़ातून