फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

Brij Narayan ChakbastBrij Narayan Chakbast19 Jan 1882 – 12 Feb 1926

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फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना
अजल क्या है खुमार-ए-बादा-ए-हस्ती उतर जाना

मुसीबत में बशर के जौहर-ए-मरदाना खुलते हैं
मुबारक बुजदिलों को गर्दिश-ए-किस्मत से डर जाना

बहुत सौदा रहा वाएज़ तुझे नार-ए-जहन्नुम का
मज़ा सोज़-ए-मोहब्बत का भी कुछ ए बेखबर जाना

Brij Narayan Chakbast
About the poet

Brij Narayan Chakbast

Brij Narayan Chakbast, also spelled, Brij Narain Chakbast,( 19 January 1882- 12 February 1926) (Kashmiri: बृज नारायण चकबस्त, Urdu: برج نارائن چکبست‎) was an Indian Urdu poet. Works Chakbast was primarily a poet but his prose is also considered at par with his…

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