दिनोंदिन - बसंत त्रिपाठी

बसंत त्रिपाठीबसंत त्रिपाठी25 Sept 1972

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दिनोंदिन
बढ़ता जा रहा संकट

दिनोंदिन समृद्धि भी
मुटाती जा रही
लगातार

दिनों दिन
उदासीनता की चर्बी
चढ़ती जा रही आत्मा पर

कोई दिन
जीतने और हारने की दुखद दास्तान से
खाली नहीं।
बसंत त्रिपाठी
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बसंत त्रिपाठी

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