वो दुनियावी ऐनक
टूट गई थी
तुम सब ने मिलकर
मेरी आँखें फोड़ दी थीं
बस !
उस दिन से ही भीतर
एक ढिबरी जलती है ।

श्याम सों होरी खेलन आई।रंग गुलाल की झोरि लिये सब नवला सज-सज आई।
(अलमित्रा ने कहा -- हमसे प्रेम के विषय में कुछ कहो। मसीहा ने सिर उठाया और सब पर शान्ति बरस पड़ी। उसने कहा -- प्रेम का संकेत मिलते ही उसके अनुगामी बन जाओ हालाँकि उसके रास्ते कठिन और दुर्गम हैं।और जब उसकी बाँहें तुम्हें घेर लें, समर्पण कर दो, हालाँकि उसके पंखों में छिपी तलवारें तुम्हें लहूलुहान कर सकते हैं, फिर भी। और जब वह शब्दों में प्रकट हो, उसमें विश्वास रखो । -- खलील जिब्रान)
(मुझे पता है कि अभी ख़ूबसूरती की क़द्र नहीं है। चेहरे की ख़ूबसूरती, विचारों और आरज़ुओं की ख़ूबसूरती, खूबसूरत लिखावट, आँखों और नज़रिए की ख़ूबसूरती, यहाँ तक कि मीठी आवाज़ की ख़ूबसूरती. -- रेहाना जब्बारी)एक पत्ते की हरी रंगत काँपती है उम्र-भर
वहाँ चार आदमी थेपहला — शब्दों से भरा हुआ था
(अत्तिला योज़ेफ़[1] के लिए)...और एक दिन अलसुबह वो बिस्तर से उठा