Selected Quotes
Poetry & Stories
प्रेम गिलहरी दिल अखरोट - बाबुषा कोहली
श्याम सों होरी खेलन आई।रंग गुलाल की झोरि लिये सब नवला सज-सज आई।
स्किट्ज़ोफ़्रेनिया, मुक्ति की नदी और खो-खो - बाबुषा कोहली
(अलमित्रा ने कहा -- हमसे प्रेम के विषय में कुछ कहो। मसीहा ने सिर उठाया और सब पर शान्ति बरस पड़ी। उसने कहा -- प्रेम का संकेत मिलते ही उसके अनुगामी बन जाओ हालाँकि उसके रास्ते कठिन और दुर्गम हैं।और जब उसकी बाँहें तुम्हें घेर लें, समर्पण कर दो, हालाँकि उसके पंखों में छिपी तलवारें तुम्हें लहूलुहान कर सकते हैं, फिर भी। और जब वह शब्दों में प्रकट हो, उसमें विश्वास रखो । -- खलील जिब्रान)
रेहाना के लिए - बाबुषा कोहली
(मुझे पता है कि अभी ख़ूबसूरती की क़द्र नहीं है। चेहरे की ख़ूबसूरती, विचारों और आरज़ुओं की ख़ूबसूरती, खूबसूरत लिखावट, आँखों और नज़रिए की ख़ूबसूरती, यहाँ तक कि मीठी आवाज़ की ख़ूबसूरती. -- रेहाना जब्बारी)एक पत्ते की हरी रंगत काँपती है उम्र-भर
सुकरात को याद करते हुए - बाबुषा कोहली
जिस दिनवो दुनियावी ऐनक
वहाँ चार आदमी थे - बाबुषा कोहली
वहाँ चार आदमी थेपहला — शब्दों से भरा हुआ था
बाबुषा कोहली: Quick Answers
When was बाबुषा कोहली born?
बाबुषा कोहली was born on 6 September 1979. Associated place: कटनी, मध्य प्रदेश, भारत.
Where can I read बाबुषा कोहली's poetry?
Kavishala has 42 poems and stories by बाबुषा कोहली, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by बाबुषा कोहली
प्रेम गिलहरी दिल अखरोट - बाबुषा कोहली
श्याम सों होरी खेलन आई।रंग गुलाल की झोरि लिये सब नवला सज-सज आई।
स्किट्ज़ोफ़्रेनिया, मुक्ति की नदी और खो-खो - बाबुषा कोहली
(अलमित्रा ने कहा -- हमसे प्रेम के विषय में कुछ कहो। मसीहा ने सिर उठाया और सब पर शान्ति बरस पड़ी। उसने कहा -- प्रेम का संकेत मिलते ही उसके अनुगामी बन जाओ हालाँकि उसके रास्ते कठिन और दुर्गम हैं।और जब उसकी बाँहें तुम्हें घेर लें, समर्पण कर दो, हालाँकि उसके पंखों में छिपी तलवारें तुम्हें लहूलुहान कर सकते हैं, फिर भी। और जब वह शब्दों में प्रकट हो, उसमें विश्वास रखो । -- खलील जिब्रान)
रेहाना के लिए - बाबुषा कोहली
(मुझे पता है कि अभी ख़ूबसूरती की क़द्र नहीं है। चेहरे की ख़ूबसूरती, विचारों और आरज़ुओं की ख़ूबसूरती, खूबसूरत लिखावट, आँखों और नज़रिए की ख़ूबसूरती, यहाँ तक कि मीठी आवाज़ की ख़ूबसूरती. -- रेहाना जब्बारी)एक पत्ते की हरी रंगत काँपती है उम्र-भर
सुकरात को याद करते हुए - बाबुषा कोहली
जिस दिनवो दुनियावी ऐनक
वहाँ चार आदमी थे - बाबुषा कोहली
वहाँ चार आदमी थेपहला — शब्दों से भरा हुआ था
ख़ुदकुशी : किसी को इतने रतजगे न दो - बाबुषा कोहली
(अत्तिला योज़ेफ़[1] के लिए)...और एक दिन अलसुबह वो बिस्तर से उठा
ख़ुदकुशी : हर कोई ख़ुद को मारने पर उतारू है - बाबुषा कोहली
(ज़िया खान को याद करते हुए)कैसे कोई सत्तर दफ़ा चढ़े-उतरे जो
ब्रेक-अप-1 - बाबुषा कोहली
वो मिला था जबउसके मन पर एक ज़िद्दी ताला पड़ा था
ब्रेक-अप-2 - बाबुषा कोहली
जैसे पंखे की ब्लेड काटती है अदृश्य कोअदृश्य के लहू में स्नान कर छूटता है देह का पसीना
ब्रेक-अप-3 - बाबुषा कोहली
आज एक सुनी-सुनाई कथा कहूँगीएक पेड़ के पास से एक बच्चा गुज़रा
ब्रेक-अप-4 - बाबुषा कोहली
उसकी कमीज़ से प्रेम करती रही मैंपसीने की तरह उसकी देह से फूटती रही
ब्रेक-अप-5 - बाबुषा कोहली
उसने कहा कि खुद को मेरे हवाले कर दोमैंने खुद को उसके हवाले कर दिया
Selected Quotes by बाबुषा कोहली (चुनिंदा उद्धरण)
श्याम सों होरी खेलन आई।रंग गुलाल की झोरि लिये सब नवला सज-सज आई।(अत्तिला योज़ेफ़[1] के लिए)...और एक दिन अलसुबह वो बिस्तर से उठावहाँ चार आदमी थेपहला — शब्दों से भरा हुआ थावो मिला था जबउसके मन पर एक ज़िद्दी ताला पड़ा थाउसने कहा -- प्रेम का संकेत मिलते ही उसके अनुगामी बन जाओ हालाँकि उसके रास्ते कठिन और दुर्गम हैं।आज एक सुनी-सुनाई कथा कहूँगीएक पेड़ के पास से एक बच्चा गुज़राVideos on बाबुषा कोहली
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