अर्जुन देव, poet
Sootradhar · Author

अर्जुन देव

अर्जुन देव

15 September 1563 – 30 September 1606गोइंदवाल, अमृतसर

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Selected Quotes

तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु, तू मेरा प्रीतम तुम सँगि हीतु॥तू मेरा पति तू है मेरा गहणा, तुझ बिनु निमखु न जाइ रहणा॥
— अर्जुन देव
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मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई।।बिलाप करे चात्रिक की निआई।।
— अर्जुन देव
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Poetry & Stories

  1. तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु - अर्जुन देव

    तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु, तू मेरा प्रीतम तुम सँगि हीतु॥तू मेरा पति तू है मेरा गहणा, तुझ बिनु निमखु न जाइ रहणा॥

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  2. मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई - अर्जुन देव

    मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई।।बिलाप करे चात्रिक की निआई।।

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  3. तेरा मुखु सुहावा जीउ सहज धुनि बाणी - अर्जुन देव

    तेरा मुखु सुहावा जीउ सहज धुनि बाणी।।चिरु होआ देखे सारिंग पाणी।।

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  4. एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता - अर्जुन देव

    एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता।।हुणे कदि मिलीए प्रीअ तुधु भगवंता।।

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  5. भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ - अर्जुन देव

    भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।

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