Selected Quotes
Poetry & Stories
तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु - अर्जुन देव
तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु, तू मेरा प्रीतम तुम सँगि हीतु॥तू मेरा पति तू है मेरा गहणा, तुझ बिनु निमखु न जाइ रहणा॥
मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई - अर्जुन देव
मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई।।बिलाप करे चात्रिक की निआई।।
तेरा मुखु सुहावा जीउ सहज धुनि बाणी - अर्जुन देव
तेरा मुखु सुहावा जीउ सहज धुनि बाणी।।चिरु होआ देखे सारिंग पाणी।।
एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता - अर्जुन देव
एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता।।हुणे कदि मिलीए प्रीअ तुधु भगवंता।।
भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ - अर्जुन देव
भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।
अर्जुन देव: Quick Answers
When was अर्जुन देव born?
अर्जुन देव was born on 15 September 1563. Associated place: गोइंदवाल, अमृतसर.
When did अर्जुन देव die?
अर्जुन देव passed away on 30 September 1606.
Where can I read अर्जुन देव's poetry?
Kavishala has 5 poems and stories by अर्जुन देव, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by अर्जुन देव
तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु - अर्जुन देव
तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु, तू मेरा प्रीतम तुम सँगि हीतु॥तू मेरा पति तू है मेरा गहणा, तुझ बिनु निमखु न जाइ रहणा॥
मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई - अर्जुन देव
मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई।।बिलाप करे चात्रिक की निआई।।
तेरा मुखु सुहावा जीउ सहज धुनि बाणी - अर्जुन देव
तेरा मुखु सुहावा जीउ सहज धुनि बाणी।।चिरु होआ देखे सारिंग पाणी।।
एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता - अर्जुन देव
एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता।।हुणे कदि मिलीए प्रीअ तुधु भगवंता।।
भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ - अर्जुन देव
भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।
Selected Quotes by अर्जुन देव (चुनिंदा उद्धरण)
तू मेरा सखा तू ही मेरा मीतु, तू मेरा प्रीतम तुम सँगि हीतु॥तू मेरा पति तू है मेरा गहणा, तुझ बिनु निमखु न जाइ रहणा॥मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई।।बिलाप करे चात्रिक की निआई।।तेरा मुखु सुहावा जीउ सहज धुनि बाणी।।चिरु होआ देखे सारिंग पाणी।।एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता।।हुणे कदि मिलीए प्रीअ तुधु भगवंता।।भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।Videos on अर्जुन देव
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