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शोकनाच - आर. चेतनक्रांति
इतनी हुनरमंद होती है ये औरतेंकि भरने को तो भर सकती हैं
पैसे के बारे में एक महत्त्वाकांक्षी कविता के लिए नोट्स - आर. चेतनक्रांति
मैं पैसे नहीं कमाताजब बहुत खुश होता हूँ, तब भी
परदे के पीछे शायद कोई आंख हो - आर. चेतनक्रांति
उससे कहा गया कि सबसे पहले तुम्हें खुद को बचाना है उसके बाद दुनिया कोअगर समय रहा तो , पूरी ट्रेनिंग का सार बस यही था
बच्ची और एक बूढ़ा पेड़ - आर. चेतनक्रांति
एक पानी की पुडि़या मिली है / माथे पर बांधे फिरता हूँ / बूंद-बूंद टपकती है / कभी आँख से / कभी रूह परशुभा के लिये
तुम्हारा क्या नहीं है, सिवा राम के - आर. चेतनक्रांति
ओ लंका के धर्म रक्षको !सारे मृत्यु मंत्र
आर. चेतनक्रांति: Quick Answers
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Poems & Stories by आर. चेतनक्रांति
शोकनाच - आर. चेतनक्रांति
इतनी हुनरमंद होती है ये औरतेंकि भरने को तो भर सकती हैं
पैसे के बारे में एक महत्त्वाकांक्षी कविता के लिए नोट्स - आर. चेतनक्रांति
मैं पैसे नहीं कमाताजब बहुत खुश होता हूँ, तब भी
परदे के पीछे शायद कोई आंख हो - आर. चेतनक्रांति
उससे कहा गया कि सबसे पहले तुम्हें खुद को बचाना है उसके बाद दुनिया कोअगर समय रहा तो , पूरी ट्रेनिंग का सार बस यही था
बच्ची और एक बूढ़ा पेड़ - आर. चेतनक्रांति
एक पानी की पुडि़या मिली है / माथे पर बांधे फिरता हूँ / बूंद-बूंद टपकती है / कभी आँख से / कभी रूह परशुभा के लिये
तुम्हारा क्या नहीं है, सिवा राम के - आर. चेतनक्रांति
ओ लंका के धर्म रक्षको !सारे मृत्यु मंत्र
हम क्रांतिकारी नहीं थे
हम क्रांतिकारी नहीं थेहम सिर्फ़ अस्थिर थे
हिंदू देश में यौन-क्रांति
मर्दों ने मान लिया थाकि उन्हें औरतें बाँट दी गईं
क्रॉसड्रेसर
कुछ काम मैंने औरतों की तरह किएकुछ नहीं, कई
सीलमपुर की लड़कियाँ
सीलमपुर की लड़कियाँ ‘विटी’ हो गईंलेकिन इससे पहले वे बूढ़ी हुई थीं
देशभक्त हे!
सपाट सोच, इकहरा दिमाग़, दिल पत्थर।सैकड़ों साल से ठहरी हुई काई ऊपर।
दस हज़ार की नौकरी और दांपत्य जीवन की एक सफल रात
अक्सर यह गुम रहती हैपीली, गुलाबी, हरी, नीली या जाने किस रंग की एक लट की तरह
परिभाषित के दरबार में
सभी जाग्रत जीवजिनकी रगों के घोड़े
Selected Quotes by आर. चेतनक्रांति (चुनिंदा उद्धरण)
कुछ काम मैंने औरतों की तरह किएकुछ नहीं, कईसपाट सोच, इकहरा दिमाग़, दिल पत्थर।सैकड़ों साल से ठहरी हुई काई ऊपर।सीलमपुर की लड़कियाँ ‘विटी’ हो गईंलेकिन इससे पहले वे बूढ़ी हुई थींअक्सर यह गुम रहती हैपीली, गुलाबी, हरी, नीली या जाने किस रंग की एक लट की तरहहम क्रांतिकारी नहीं थेहम सिर्फ़ अस्थिर थेसभी जाग्रत जीवजिनकी रगों के घोड़ेVideos on आर. चेतनक्रांति
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