हम तो ये बात जान के हैरान हैं बहुत

Aalok ShrivastavAalok Shrivastav30 Dec 1971

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हम तो ये बात जान के हैरान हैं बहुत
खामोशियों में शोर के तूफ़ान हैं बहुत

बाज़ार जा के खुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दूकान में सामान हैं बहुत

अच्छा सा कामकाज खुली आँख से चुनो
ख़्वाबों के लेन देन में नुक्सान है बहुत

आवाज़ बर्तनों की घरों में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाके हैं शैतान हैं बहुत

खुशहाल घर को जाने नज़र किसकी लग गई
हम लोग कुछ दिनों से परेशान हैं बहुत

आवाज़ साथ है न बदन का कहीं पता
अब के सफर में रास्ते सूनसान हैं बहुत

Aalok Shrivastav
About the poet

Aalok Shrivastav

Alok Shrivastava is a Young Poet and Story Writer. his Compositions published in important literary magazines. His He was honored with 'A and Bheinav Shilpi Samman' for writing Ghazal in the year 2002.Ghazal collection published from Rajkamal Publications, De…

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