ज़ेबा, poet
Sootradhar · Author

ज़ेबा

ज़ेबा

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About ज़ेबा

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Selected Quotes

हुआ है इश्क़ में कम हुस्न-ए-इत्तिफ़ाक़ ऐसा कि दिल को यार तो दिल यार को पसंद हुआ
— ज़ेबा
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पहले क्या था जो किया करते थे तारीफ़ मिरी अब हुआ क्या जो बुरा हो गया अच्छा हो कर
— ज़ेबा
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पीठकिसी की भी हो पीठकाम है लादना और ढोना— प्रताप सोमवंशीदिलभावुक, बच्चा, बेवकूफ, बदतमीजक्या क्या विशेषण नहीं है एक दिल के पास— प्रताप सोमवंशीदरिया-दिली से अब्र-ए-करम भी नहीं मिलादरिया-दिली से अब्र-ए-करम भी नहीं मिलालेकिन मुझे नसीब से कम भी नहीं मिला— मुनव्वर रानापैरों को मिरे दीदा-ए-तर बाँधे हुए हैपैरों को मिरे दीदा-ए-तर बाँधे हुए हैज़ंजीर की सूरत मुझे घर बाँधे हुए है— मुनव्वर रानानज़्र-ए-योगेश प्रवीन नज़्र-ए-लखनऊलखनऊ मेरे वतन! ये तुझको आख़िर क्या हुआतेरा चेहरा दिख रहा है दर्द में डूबा हुआ— हिमांशु बाजपेयीमैं इक्कीसवीं सदी का एक दृश्य हूँपत्नी के शव को अकेले कंधे पर ले जाते हुए दाना माँझी को टी.वी. पर देखते हुएमैं बहुत देर तक अपने कंधे के विकल्प ढूँढ़ता रहा— हरीशचंद्र पांडे