कातिक पयान करने को है, उठाया है
दाहिना चरण, देहरी को लाँघ आया है,
लेकिन अँगूठा अभी भूमि से लगा नहीं,
ऊपर ही ऊपर है, जैसे जगा नहीं ।
कातिक पयान करने को है, उठाया है
दाहिना चरण, देहरी को लाँघ आया है,
लेकिन अँगूठा अभी भूमि से लगा नहीं,
ऊपर ही ऊपर है, जैसे जगा नहीं ।

कवि त्रिलोचन (20-08-1917 - 09-12-2007) हिंदी भाषा के श्रेष्ठ कवि थे . उन्हें हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है। वे आधुनिक हिंदी कविता की प्रगतिशील त्रयी के तीन स्तंभों में से एक थे। त्रिलोचन शास्त्री हिंदी के अतिरिक्त अरबी…
View profile & all 24 Poems / Storiesयूँ ही कुछ मुस्काकर तुमनेपरिचय की वो गाँठ लगा दी !
विदा किया तब कहा कि यह लाना वह लाना,ग्वैड़े आया, और हाथ दोनों हैं ख़ाली;
सचमुच, इधर तुम्हारी याद तो नहीं आई,झूठ क्या कहूँ। पूरे दिन मशीन पर खटना,
अधिभूतमदन के शर केवल पाँच हैं
दिन ये फूल के हैंमत जाना चले कहीं भूल के