दिन ये फूल के हैं

TrilochanTrilochan20 Aug 1917 – 9 Dec 2007

1 min read · 12.8K reads

दिन ये फूल के हैं
मत जाना चले कहीं भूल के

दिन ये फूल के हैं


किए मन के सिंगार

सामने कचनार

आम के बौर कहते हैं

देखो बहार

हाल ऎसे ही कुछ

अब बबूल के हैं


कोई रूठे मनाओ

जाओ जाओ अपनाओ

इस हवा की समझ से

सभी को समझाओ

कितने दिन फूल मंदिर

में धूल के हैं


आ गई वह कली

आज अपनी गली

कल जो आई थी

पहचान पा कर खिली

प्राण धारा के हैं

कहाँ कूल के हैं

 

Trilochan
About the poet

Trilochan

कवि त्रिलोचन (20-08-1917 - 09-12-2007) हिंदी भाषा के श्रेष्ठ कवि थे . उन्हें हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है। वे आधुनिक हिंदी कविता की प्रगतिशील त्रयी के तीन स्तंभों में से एक थे। त्रिलोचन शास्त्री हिंदी के अतिरिक्त अरबी…

View profile & all 24 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like