मेरा समय

त्रिभुवनत्रिभुवन

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मेरे क्षण उनके क्षण नहीं हैं।

मेरे रास्ते उनके रास्ते नहीं हैं

मेरी हवा, मेरा पानी, मेरी ज़मीन

और मेरे आकाश बहुत अलग हैं।

मेरी आग और उनकी आग बहुत भिन्न हैं।

मेरे रण उनके रण नहीं हैं।

त्रिभुवन
About the poet

त्रिभुवन

सुपरिचित कवि-लेखक और पत्रकार।

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