मेरे क्षण उनके क्षण नहीं हैं।
मेरे रास्ते उनके रास्ते नहीं हैं
मेरी हवा, मेरा पानी, मेरी ज़मीन
और मेरे आकाश बहुत अलग हैं।
मेरी आग और उनकी आग बहुत भिन्न हैं।
मेरे रण उनके रण नहीं हैं।
मेरे क्षण उनके क्षण नहीं हैं।
मेरे रास्ते उनके रास्ते नहीं हैं
मेरी हवा, मेरा पानी, मेरी ज़मीन
और मेरे आकाश बहुत अलग हैं।
मेरी आग और उनकी आग बहुत भिन्न हैं।
मेरे रण उनके रण नहीं हैं।

कुछ लोग कहते हैं इस देश में लोग रहते हैंमुझे लगता है, इस देश में सिर्फ़ एक संख्या भर रहती है
क्या यह सिर्फ़ मेरा सपना था?क्या मेरे भीतर एक दिव्य तत्त्व की अनुगूँज थी?
बात ऐसी है कि एक दिनइस धरती पर एक लहर चली
लौटते पत्र के साथकुछ बादल भेजना
एक दिन एक लड़की मेरे दफ़्तर आईऔर बोली : मेरी ख़बर छाप दो