मैं चला जाऊँगा

त्रिभुवनत्रिभुवन

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मैं चला जाऊँगा

चला जाऊँगा

जाऊँगा।

जाऊँगा

चलने के लिए

चलूँगा जाने के लिए।

गाऊँगा जाने के लिए

जाऊँगा गाने के लिए

जाता जाता चला जाऊँगा

गाता गाता चला जाऊँगा।

चलने में क्या है

बैठे-बैठे चला जाऊँगा

सोते-सोते चला जाऊँगा

हँसते-हँसते चला जाऊँगा।

तुम भी साथ नहीं चलोगी

वह भी साथ नहीं चलेगा

चलते समय भी चलता रहूँगा

जलते समय भी चलता रहूँगा।

त्रिभुवन
About the poet

त्रिभुवन

सुपरिचित कवि-लेखक और पत्रकार।

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