Selected Quotes
Poetry & Stories
बाज़-गश्त
नग़्मा-ज़ार-ए-दर्द की जानिब चले हमएक भी ज़र्रा न कुचला जाए इस रफ़्तार से
प्रीती
तुम नहीं हो मिटने वाली नहींपाती हो जनम तुम नए नए
याद-ए-वतन
पौदे नहीं अकेलेछाया है इन की संगी साथी
खेल रुतों का
इक रुत आए इक जाएहम रुत रुत चौंकें
याद नगर
मैं ओस बन के बरस जाऊँ तेरे सब्ज़े परमैं गीत बन के तिरी वादियों में खो जाऊँ
शफ़ीक़ फातिमा शेरा: Quick Answers
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Poems & Stories by शफ़ीक़ फातिमा शेरा
बाज़-गश्त
नग़्मा-ज़ार-ए-दर्द की जानिब चले हमएक भी ज़र्रा न कुचला जाए इस रफ़्तार से
प्रीती
तुम नहीं हो मिटने वाली नहींपाती हो जनम तुम नए नए
याद-ए-वतन
पौदे नहीं अकेलेछाया है इन की संगी साथी
खेल रुतों का
इक रुत आए इक जाएहम रुत रुत चौंकें
याद नगर
मैं ओस बन के बरस जाऊँ तेरे सब्ज़े परमैं गीत बन के तिरी वादियों में खो जाऊँ
इक सितारा आदर्श का
ऐ तमाशा-गाह-ए-आलम रोए तूमाह-ए-नौ
सीता
तिरा नाम ले कर सहर जागती हैतिरे गीत गाती है तारों की महफ़िल
सदा ब-सहरा
सखी फिर आ गई रुत झूलने की गुनगुनाने कीसियह आँखों की तह में बिजलियों के डूब जाने की
ऐ हम-नफ़साँ
बुलडोज़र क़दमों से चलतीकॉलोनी बकतर-बंद नई
मुसाफ़िर परिंदे
उफ़ुक़ ता उफ़ुक़ नीलगूँ आसमाँमुसाफ़िर परिंदों की मंज़िल कहाँ
लब-कुशा
ये चुप कितने दिन की थी जो आंसुओं में ढलीये गहरी चट्टान ऐसी पथरीली जामिद अनोखी सी चुप
निर्मल मीठे पानी की तलाश
वो मिरा वहमकि झोंका सा कोई सब्ज़-क़बा था
Selected Quotes by शफ़ीक़ फातिमा शेरा (चुनिंदा उद्धरण)
ऐ तमाशा-गाह-ए-आलम रोए तूमाह-ए-नौतिरा नाम ले कर सहर जागती हैतिरे गीत गाती है तारों की महफ़िलबुलडोज़र क़दमों से चलतीकॉलोनी बकतर-बंद नईनग़्मा-ज़ार-ए-दर्द की जानिब चले हमएक भी ज़र्रा न कुचला जाए इस रफ़्तार सेवो मिरा वहमकि झोंका सा कोई सब्ज़-क़बा थासखी फिर आ गई रुत झूलने की गुनगुनाने कीसियह आँखों की तह में बिजलियों के डूब जाने कीVideos on शफ़ीक़ फातिमा शेरा
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