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अनाज पकने का समय - नीलोत्पल
खड़ी हैं गर्भस्थ शिशुओं के संग नदी की धार पर माएंकैलेंडर में छूट गए खानों जैसे-तीलियों से भरी माचिस हैं बच्चो
पृथ्वी को हमने जड़ें दीं - नीलोत्पल
नीलोत्पलजन्म : 23 जून, 1975, रतलाम, (मध्य प्रदेश)।
हमारे बीच जाने कितने समुन्दर हैं - नीलोत्पल
उस पुराने जर्जर मकान की तरहजहाँ अब कोई नहीं रहता
प्रेम की आदिम गुफ़ाओं में - नीलोत्पल
हम कोई शुरूआत नहीं करतेहम सिर्फ़ प्रेम करना चाहते हैं
एक बार तुम खो दो अपनी आवाज़ - नीलोत्पल
तुम खोल लो अपनी बाँहेंऔर बीत जाने दो बारिश
नीलोत्पल: Quick Answers
When was नीलोत्पल born?
नीलोत्पल was born on 23 September 1975. Associated place: रतलाम, मध्य प्रदेश, भारत.
Where can I read नीलोत्पल's poetry?
Kavishala has 38 poems and stories by नीलोत्पल, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by नीलोत्पल
अनाज पकने का समय - नीलोत्पल
खड़ी हैं गर्भस्थ शिशुओं के संग नदी की धार पर माएंकैलेंडर में छूट गए खानों जैसे-तीलियों से भरी माचिस हैं बच्चो
पृथ्वी को हमने जड़ें दीं - नीलोत्पल
नीलोत्पलजन्म : 23 जून, 1975, रतलाम, (मध्य प्रदेश)।
हमारे बीच जाने कितने समुन्दर हैं - नीलोत्पल
उस पुराने जर्जर मकान की तरहजहाँ अब कोई नहीं रहता
प्रेम की आदिम गुफ़ाओं में - नीलोत्पल
हम कोई शुरूआत नहीं करतेहम सिर्फ़ प्रेम करना चाहते हैं
एक बार तुम खो दो अपनी आवाज़ - नीलोत्पल
तुम खोल लो अपनी बाँहेंऔर बीत जाने दो बारिश
गीले पेड़ - नीलोत्पल
शायद मुझे सभी ग़लत कहेंगेलेकिन कोई नहीं जानता
मैं तुममें घटकर बढ़ता हूँ - नीलोत्पल
मैं तुम्हें करता हूँ प्यारइन ऊँचाईयों से
लिखता हूँ पानी की सतह पर - नीलोत्पल
मैं तुम पर क्यों लिखता हूँइसकी मेरे पास कोई वजह नहीं
मुझे तुमसे प्रेम है - नीलोत्पल
मैं जीतता हूँक्योंकि मुझे तुमसे प्रेम है
चुनाव - नीलोत्पल
बहुत सारे सचऔर बहुत सारे झूठ सुनने के बाद
समर - नीलोत्पल
दिन भर हम युद्ध करते हैंअपने जीने के साथ
रिश्ते सीढ़ियों की तरह - नीलोत्पल
रिश्ते सीढ़ियों की तरह हैंकोई चढ़ता है, कोई उतरता है
Selected Quotes by नीलोत्पल (चुनिंदा उद्धरण)
खड़ी हैं गर्भस्थ शिशुओं के संग नदी की धार पर माएंकैलेंडर में छूट गए खानों जैसे-तीलियों से भरी माचिस हैं बच्चोउस पुराने जर्जर मकान की तरहजहाँ अब कोई नहीं रहताहम कोई शुरूआत नहीं करतेहम सिर्फ़ प्रेम करना चाहते हैंतुम खोल लो अपनी बाँहेंऔर बीत जाने दो बारिशमैं तुम्हें करता हूँ प्यारइन ऊँचाईयों सेमैं तुम पर क्यों लिखता हूँइसकी मेरे पास कोई वजह नहींVideos on नीलोत्पल
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