प्यार बिना शर्तों के

लीना मल्होत्रा रावलीना मल्होत्रा राव3 Oct 1968

1 min read · 12.4K reads

मैं एक पारदर्शी अँधेरा हूँ

इंतज़ार कर रहा हूँ अपनी बारी का

रात होते ही उतरूँगा तुम्हारे कंधों पर

तुम्हारे बालों के वलय की घुप्प सुरंगें रार करती हैं मुझसे

तुम एक ही बाली क्यों पहनती हो प्रिये

आमंत्रण देती है मुझे ये

एक झूला झूल लेने का

और यह पिरामिड जहाँ से

समय भी गुज़रते हुए अपनी चाल धीमी कर लेता है

हवाओं को अनुशासित करते हैं

और हवाएँ एक संगीत की तरह आती-जाती रहती हैं

जिसमें एक शरद ऋतु चुपचाप पिघल कर बहती रहती है

तुम्हारी थकी-मुँदती आँखों में तुम्हारे ठीक सोने से पहले

मैं चमकते हुए सपने रख देता हूँ

और अपनी सारी सघनता झटक कर पारदर्शी बन जाता हूँ

ताकि मेरी सघनता तुम्हारे सपनों में व्यवधान न प्रस्तुत कर दे

क्या तुमने सोते हुए ख़ुद को कभी देखा है?

निश्चिंत... अँधेरे को समर्पित

असहाय... पस्त... नींद के आग़ोश में गुम

सपने भी वही देखती हो जो मैं तुम्हें परोसता हूँ

और तुम्हारी देह के वाद्यों से निकली अनुगूँज को नापते हुए

मेरी रात गुज़र जाती है

और मैं तुम्हारा ही एक उपनिवेश बनकर

ग़र्क़ हो जाना चाहता हूँ तुम्हारे पलंग के नीचे

तुम्हें उठना है सूरज के स्वागत के लिए तरोताज़ा

भागती रहोगी तुम शापित हाय

सूरज के पीछे

और मैं सजाता रहूँगा पूरा दिन वो सपने जो दे सकें तुम्हें ऊर्जा

देखा कितना सार्थक है मेरा होना तुम्हारे और सूरज के बीच में धरा

क्या तुम मुझे पहचानती हो

मैं हर बार उतरा हूँ तुम्हारे क़दमों में

और पी गया हूँ तुम्हारी सारी थकान

और अनंतकाल से मैं सोया नहीं हूँ

जबकि तुम अनंतकाल से भाग रही हो सूरज के पीछे

और तब जब भूल जाती हो मुझे एक स्वप्न की तरह

मैं लैम्पपोस्ट के नीचे खड़ा होकर प्रतीक्षा करता हूँ तुम्हारी

प्यार करता हूँ बिना शर्तों के।

लीना मल्होत्रा राव
About the poet

लीना मल्होत्रा राव

सुपरिचित कवयित्री। स्त्रीवादी संवेदना-सरोकारों के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : लीना मल्होत्रा राव जन्म : 03/10/1968 | गुरुग्राम, हरियाणा कविताओं के सोशल मीडिया दौर में पहले-पहल सामने आईं सुपरिचित कवयित्री लीना मल्होत्रा राव का जन्म 3 अक्टूबर 1968 को गुड़गाँव, हरिय…

View profile & all 15 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like