ईश्वर के बारे में सोचते हुए
मैं बाघ के बारे में सोचने लगता हूँ
बाघ के बारे में सोचते हुए
मैं मनुष्यों के बारे में सोचने लगता हूँ
मनुष्यों के बारे में सोचते हुए
अचानक मेरी सोच बदल जाती है
तब सोचने लगता हूँ—
बाघ मनुष्यों से क्यों दूर रहते हैं।
ईश्वर के बारे में सोचते हुए
मैं बाघ के बारे में सोचने लगता हूँ
बाघ के बारे में सोचते हुए
मैं मनुष्यों के बारे में सोचने लगता हूँ
मनुष्यों के बारे में सोचते हुए
अचानक मेरी सोच बदल जाती है
तब सोचने लगता हूँ—
बाघ मनुष्यों से क्यों दूर रहते हैं।

लड़कियों के बारे में सोचते हुएमैं लड़कों के बारे में सोचने लगता हूँ
दुनिया में ऐसी कोई चीज़ नहीं जिसकी आयु नहीं होमनुष्य की आयु से निर्धारित होती है
हत्यारे के खूँटे में बँधी बकरीबड़े चाव से खा रही है घास और पत्तियाँ
संसार की सारी घड़ियों मेंठीक एक ही समय पर समय एक नहीं होता
जितने लोग बोल रहे हैंउससे कहीं अधिक लोग चुप हैं