Couplets | कैफ़ी आज़मी

Kaifi AzmiKaifi Azmi14 Jan 1991 – 10 May 2002

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बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में

कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में


झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं

दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं


इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं

दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद


बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए

इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए


मुद्दत के बा'द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह

जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े


मेरा बचपन भी साथ ले आया

गाँव से जब भी आ गया कोई


कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले

उस इंक़लाब का जो आज तक उधार सा है


रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई

तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई


पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था

जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा


जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क

यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े


अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ

वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं


गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो

डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ


बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें

मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले


इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े

हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े


ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप

क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बाद


जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ

यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता


बहार आए तो मेरा सलाम कह देना

मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने


कोई कहता था समुंदर हूँ मैं

और मिरी जेब में क़तरा भी नहीं


रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे

फिर वहीं लौट के आ जाता हूँ


रोज़ बस्ते हैं कई शहर नए

रोज़ धरती में समा जाते हैं


Kaifi Azmi
About the poet

Kaifi Azmi

Athar Hussein Rizvi, known as Kaifi Azmi, was an Indian Urdu poet. He is remembered as the one who brought Urdu literature to Indian motion pictures. Together with Pirzada Qasim, Jaun Elia and others he participated in many memorable Mushaira gatherings of th…

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