नहीं जानता, सोने वालों के देश में
कौन-सा स्वप्न देख रहा होगा! (वह)
अगर देख रहा हो एक स्वप्न
(तो) वह कहा भी कैसे जाए!
क्या बच्चे एक साथ चिल्ला रहे होंगे—?
ओ धूप निकल आओ—
छाया रानी अंदर चली जाओ।
धूप फिर न डरे, लगाया गया होगा शायद? (पोस्टर)
“फासिस्ट नहीं आया—
डरने की कोई बात नहीं—
ओ धूप निकल आओ”
सोने वालों के देश में।








