सोने वालों के देश में

हिजम इराबत सिंहहिजम इराबत सिंह

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नहीं जानता, सोने वालों के देश में

कौन-सा स्वप्न देख रहा होगा! (वह)

अगर देख रहा हो एक स्वप्न

(तो) वह कहा भी कैसे जाए!

क्या बच्चे एक साथ चिल्ला रहे होंगे—?

ओ धूप निकल आओ—

छाया रानी अंदर चली जाओ।

धूप फिर न डरे, लगाया गया होगा शायद? (पोस्टर)

“फासिस्ट नहीं आया—

डरने की कोई बात नहीं—

ओ धूप निकल आओ”

सोने वालों के देश में।

हिजम इराबत सिंह
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हिजम इराबत सिंह

हिजम इराबत सिंह

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