मृत्यु

हरिशंकरन अशोकनहरिशंकरन अशोकन

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मृत्यु के बग़ल वाले कमरे में रहता है प्रेम।

मृत्यु ने बीच की दीवार में

छेद बना रखा है—

प्रेम की नग्नता देखने के लिए।

एक दिन प्रेम ने उसी छेद से

मृत्यु की तरफ़ झाँका

और इसके बाद

पंखा बंद करके

घाघरे के नाड़े से

लटक कर ख़ुदकुशी कर ली।

हरिशंकरन अशोकन
About the poet

हरिशंकरन अशोकन

मलयालम की नई पीढ़ी के प्रसिद्ध कवि। दो कविता-संग्रह प्रकाशित।

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