अफ़सोस नहीं इसका हमको, जीवन में हम कुछ कर न सके,
झोलियाँ किसी की भर न सके, सन्ताप किसी का हर न सके,
अपने प्रति सच्चा रहने का, जीवन भर हमने काम किया,
देखा-देखी हम जी न सके, देखा-देखी हम मर न सके ।
अफ़सोस नहीं इसका हमको, जीवन में हम कुछ कर न सके,
झोलियाँ किसी की भर न सके, सन्ताप किसी का हर न सके,
अपने प्रति सच्चा रहने का, जीवन भर हमने काम किया,
देखा-देखी हम जी न सके, देखा-देखी हम मर न सके ।

Gopal Singh Nepali (11 August 1911 – 17 April 1963) was an Indian poet of Hindi literature and a lyricist of Bollywood. His association with Bollywood spanned around two decades, beginning in 1944 and ended with his death in 1963.Nepali ji, who made a separat…
View profile & all 28 Poems / Storiesमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँनील गगन में पंख पसारूँ;
बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे
तू चिंगारी बनकर उड़ री, जाग-जाग मैं ज्वाल बनूँ,तू बन जा हहराती गँगा, मैं झेलम बेहाल बनूँ,
दिल चुरा कर न हमको बुलाया करोगुनगुना कर न गम को सुलाया करो,
प्रिये तुम्हारी इन आँखों में मेरा जीवन बोल रहा हैबोले मधुप फूल की बोली, बोले चाँद समझ लें तारे