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Poetry & Stories
प्रिया प्रसाद - घनानंद
राधा राधा राधा कहौं ।कहि कहि राधा राधा लहौं ॥१॥
वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहै - घनानंद
वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहैलड़कीली बानि आनि उर मैं अरति है।
लाजनि लपेटि चितवनि - घनानंद
लाजनि लपेटि चितवनि भेद-भाय भरीलसति ललित लोल चख तिरछानि मैं।
झलकै अति सुन्दर आनन गौर - घनानंद
झलकै अति सुन्दर आनन गौर, छके दृग राजत काननि छ्वै।हँसि बोलनि मैं छबि फूलन की बरषा, उर ऊपर जाति है ह्वै।
छवि को सदन मोद मंडित - घनानंद
छवि को सदन मोद मंडित बदन-चंदतृषित चषनि लाल, कबधौ दिखाय हौ।
घनानंद: Quick Answers
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Poems & Stories by घनानंद
प्रिया प्रसाद - घनानंद
राधा राधा राधा कहौं ।कहि कहि राधा राधा लहौं ॥१॥
वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहै - घनानंद
वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहैलड़कीली बानि आनि उर मैं अरति है।
लाजनि लपेटि चितवनि - घनानंद
लाजनि लपेटि चितवनि भेद-भाय भरीलसति ललित लोल चख तिरछानि मैं।
झलकै अति सुन्दर आनन गौर - घनानंद
झलकै अति सुन्दर आनन गौर, छके दृग राजत काननि छ्वै।हँसि बोलनि मैं छबि फूलन की बरषा, उर ऊपर जाति है ह्वै।
छवि को सदन मोद मंडित - घनानंद
छवि को सदन मोद मंडित बदन-चंदतृषित चषनि लाल, कबधौ दिखाय हौ।
जासों प्रीति ताहि निठुराई - घनानंद
जासों प्रीति ताहि निठुराई सों निपट नेह,कैसे करि जिय की जरनि सो जताइये।
भोर तें साँझ लौ कानन ओर निहारति - घनानंद
जासों प्रीति ताहि निठुराई सों निपट नेह,कैसे करि जिय की जरनि सो जताइये।
भए अति निठुर - घनानंद
भए अति निठुर, मिटाय पहचानि डारी,याही दुख में हमैं जक लागी हाय हाय है।
हीन भएँ जल मीन अधीन - घनानंद
भए अति निठुर, मिटाय पहचानि डारी,याही दुख में हमैं जक लागी हाय हाय है।
मीत सुजान अनीत करौ जिन - घनानंद
भए अति निठुर, मिटाय पहचानि डारी,याही दुख में हमैं जक लागी हाय हाय है।
पहिले घन-आनंद सींचि सुजान कहीं बतियाँ - घनानंद
भए अति निठुर, मिटाय पहचानि डारी,याही दुख में हमैं जक लागी हाय हाय है।
क्यों हँसि हेरि हियरा - घनानंद
भए अति निठुर, मिटाय पहचानि डारी,याही दुख में हमैं जक लागी हाय हाय है।
Selected Quotes by घनानंद (चुनिंदा उद्धरण)
भए अति निठुर, मिटाय पहचानि डारी,याही दुख में हमैं जक लागी हाय हाय है।वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहैलड़कीली बानि आनि उर मैं अरति है।लाजनि लपेटि चितवनि भेद-भाय भरीलसति ललित लोल चख तिरछानि मैं।जासों प्रीति ताहि निठुराई सों निपट नेह,कैसे करि जिय की जरनि सो जताइये।झलकै अति सुन्दर आनन गौर, छके दृग राजत काननि छ्वै।हँसि बोलनि मैं छबि फूलन की बरषा, उर ऊपर जाति है ह्वै।छवि को सदन मोद मंडित बदन-चंदतृषित चषनि लाल, कबधौ दिखाय हौ।Videos on घनानंद
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