मैं तो तुम्हारा पीछा करते हुए ही दुनिया में आया था
और पीछा करते हुए ही चला जाऊँगा।
मेरे सारे कौतुक तुम्हारे लिए ही थे।
मेरा हर बहुरूप तुम्हारे लिए ही था।
सरकती पैंट और बहती नाक के समय से लेकर
बढ़ती तोंद और झूलती झुर्रियों के समय तक
मेरे सारे कार्य व्यापार तुम्हारे लिए ही थे।
तुम हो कि रौशनी में, रंगों में, सुगंधों में मिलते हो।








