अफ़वाह

फ़रीद ख़ाँफ़रीद ख़ाँ

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हर बस्ती में अफ़वाहों के तालाब के लिए छोटे बड़े गड्ढे होते हैं।

पहले बादलों के फाहे की तरह ऊपर से गुजरती है अफ़वाह,

थोड़ी बूँदा-बाँदी करती हुई।

फिर अफ़वाहों का घना बादल आता है

और पूरी बस्ती सराबोर हो जाती है।

छतों, छप्परों और दीवारों को भिगोते हुए

छोटी से छोटी नालियों से गुज़रते हुए

अफ़वाह इकट्ठी होती है नदी, तालाब, झीलों में।

कई शहरों में तो पीने के लिए भी सप्लाई की जाती है,

इन झीलों की अफ़वाह।

फ़रीद ख़ाँ
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फ़रीद ख़ाँ

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