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Poetry & Stories
अभिधा - देवशंकर नवीन
कि तुम सुमनों की कोमलता, कि तुम हिरनी की चंचलताकि तुम कलियों की तरूणाईत्, तुम तुलसी की चौपाई
जानवर - देवशंकर नवीन
मनुष्य जातिकें ठकबहमरा लेल बड़ दुष्कर काज अछि
बोध - देवशंकर नवीन
बान्हल हमर मुरेठाकें नहिरहलै अछि ककरहु सन्त्रास
एकता आ षड्यन्त्र - देवशंकर नवीन
बूढ़-पुरान कहलिन-एकतामे बड्ड बल छैक
मनोरथ - देवशंकर नवीन
हमरा वरदान दिअ’ गुरूदेव !जे हम धृत्तराष्ट्र नहि बनि सकी
देवशंकर नवीन: Quick Answers
When was देवशंकर नवीन born?
देवशंकर नवीन was born on 2 September 1962. Associated place: मोहनपुर, नौहट्टा सहरसा, बिहार।.
Where can I read देवशंकर नवीन's poetry?
Kavishala has 6 poems and stories by देवशंकर नवीन, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by देवशंकर नवीन
अभिधा - देवशंकर नवीन
कि तुम सुमनों की कोमलता, कि तुम हिरनी की चंचलताकि तुम कलियों की तरूणाईत्, तुम तुलसी की चौपाई
जानवर - देवशंकर नवीन
मनुष्य जातिकें ठकबहमरा लेल बड़ दुष्कर काज अछि
बोध - देवशंकर नवीन
बान्हल हमर मुरेठाकें नहिरहलै अछि ककरहु सन्त्रास
एकता आ षड्यन्त्र - देवशंकर नवीन
बूढ़-पुरान कहलिन-एकतामे बड्ड बल छैक
मनोरथ - देवशंकर नवीन
हमरा वरदान दिअ’ गुरूदेव !जे हम धृत्तराष्ट्र नहि बनि सकी
कालचक्र - देवशंकर नवीन
अहां चरणोदक पीबि कए अमर हएबाक चेष्टाकरैत रहू
Selected Quotes by देवशंकर नवीन (चुनिंदा उद्धरण)
बान्हल हमर मुरेठाकें नहिरहलै अछि ककरहु सन्त्रासकि तुम सुमनों की कोमलता, कि तुम हिरनी की चंचलताकि तुम कलियों की तरूणाईत्, तुम तुलसी की चौपाईमनुष्य जातिकें ठकबहमरा लेल बड़ दुष्कर काज अछिबूढ़-पुरान कहलिन-एकतामे बड्ड बल छैकहमरा वरदान दिअ’ गुरूदेव !जे हम धृत्तराष्ट्र नहि बनि सकीअहां चरणोदक पीबि कए अमर हएबाक चेष्टाकरैत रहूVideos on देवशंकर नवीन
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