दत्त, poet
Sootradhar · Author

दत्त

दत्त

nan

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Selected Quotes

चँदन के चहला मेँ परी परी पँकज की पँखुरी नरमी मैँ ।धाय धसी खसखानन हाय निकुँजन पुँज भिरी भरमी मैँ ।
— दत्त
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ग्रीषम में तपै भीषम भानु,गई बनकुंज सखीन की भूल सों.घाम सों बामलता मुरझानी,बयारि करै घनश्याम दुकूल सों.
— दत्त
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उसने मिट्टी को छुआ भर था - प्रताप सोमवंशीपसोपेश में हूँकि कविता चिह्नों में होती है— प्रताप सोमवंशीदर्द औरों का हम - प्रताप सोमवंशीपसोपेश में हूँकि कविता चिह्नों में होती है— प्रताप सोमवंशीये हिज्र का रस्ता है ढलानें नहीं होतींये हिज्र का रस्ता है ढलानें नहीं होतींसहरा में चराग़ों की दुकानें नहीं होतीं— मुनव्वर रानाजुदा रहता हूँ मैं तुझ से तो दिल बे-ताब रहता हैजुदा रहता हूँ मैं तुझ से तो दिल बे-ताब रहता हैचमन से दूर रह के फूल कब शादाब रहता है— मुनव्वर रानाआगगाड़ी आ रही हैएकआगगाड़ी दौड़ती आ रही है। उसका आरव प्रतिध्वनित— ओ. एम. अनुजनक्या रिश्ता रहा भला...क्या रिश्ता रहा भला ज़िंदगी सेठुकरा दिया है जब उसने मुझे!— हब्बा ख़ातून