छीतस्वामी, poet
Sootradhar · Author

छीतस्वामी

छीतस्वामी

nan

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About छीतस्वामी

छीतस्वामी वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) के आठ कवियों (अष्टछाप कवि) में एक। जिन्होने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का अपने पदों में वर्णन किया। इनका जन्म १५१५ ई० में हुआ था। मथुरा के चतुर्वेदी ब्राह्मण थे। घर में जजमानी और पंडागिरी होती थी। प्रसिद्ध है कि ये बीरबल के पुरोहित थे। पंडा होने के कारण पहले ये बड़े अक्खड…

Selected Quotes

भोर भए नवकुंज सदन तें,आवत लाल गोवर्धन धारी.लटपट पग मरगजी माला,सिथिल अंग डगमग गति न्यारी.
— छीतस्वामी
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भोग श्रृंगार यशोदा मैया,श्री विट्ठलनाथ के हाथ को भावें ।नीके न्हवाय श्रृंगार करत हैं, आछी रुचि सों मोही पाग बंधावें ॥
— छीतस्वामी
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Poetry & Stories

  1. आगे गाय पाछें गाय इत गाय उत गाय - छीतस्वामी

    आगे गाय पाछें गाय इत गाय उत गाय,गोविंद को गायन में बसबोइ भावे।

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  2. सुमिर मन गोपाल लाल सुंदर अति रूप जाल - छीतस्वामी

    सुमिर मन गोपाल लाल सुंदर अति रूप जाल,मिटिहैं जंजाल सकल निरखत सँग गोप बाल।

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  3. भोर भए नवकुंज सदन तें - छीतस्वामी

    भोर भए नवकुंज सदन तें,आवत लाल गोवर्धन धारी.लटपट पग मरगजी माला,सिथिल अंग डगमग गति न्यारी.

    2 min read · 12.4K reads
  4. भई अब गिरिधर सों पैहचान - छीतस्वामी

    भई अब गिरिधर सों पैहचान।कपट रूप धरि छल के आयौ, परषोत्तम नहिं जान।।

    1 min read · 12.3K reads
  5. भोग श्रृंगार यशोदा मैया - छीतस्वामी

    भोग श्रृंगार यशोदा मैया,श्री विट्ठलनाथ के हाथ को भावें ।नीके न्हवाय श्रृंगार करत हैं, आछी रुचि सों मोही पाग बंधावें ॥

    2 min read · 12.4K reads

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