बोधा, poet
Sootradhar · Author

बोधा

बोधा

nan

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Selected Quotes

लोक की लाज औ सोच प्रलोक को, वारिये प्रीति के ऊपर दोऊ।गाँव को गेह को देह को नातो, सनेह मैं हाँ तो करै पुनि सोऊ ॥
— बोधा
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अति छीन मृनाल के तारहु ते, तेहि ऊपर पाँव दै आवनो है।सुई बेह ते द्वार सकीन तहाँ, परतीति को हाँड़ो दावनो है॥
— बोधा
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Poetry & Stories

  1. हिलि मिलि जानै तासोँ मिलिकै जनावै हेत - बोधा

    हिलि मिलि जानै तासोँ मिलिकै जनावै हेत ,हित को न जानै ताको हितू न बिसाहिये ।

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  2. काँपत गात सकात बतात है साँकरी खोरि निशा अँधियारी - बोधा

    काँपत गात सकात बतात है साँकरी खोरि निशा अँधियारी ।पातहू के खरके छरकै धरकै उर लाय रहै सुकुमारी ।

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  3. अति छीन मृनाल के तारहु ते - बोधा

    अति छीन मृनाल के तारहु ते, तेहि ऊपर पाँव दै आवनो है।सुई बेह ते द्वार सकीन तहाँ, परतीति को हाँड़ो दावनो है॥

    2 min read · 12.4K reads
  4. वह प्रीति की रीति को जानत थो - बोधा

    वह प्रीति की रीति को जानत थो, तबहीं तो बच्यो गिरि ढाहन तैं।गजराज चिकारि कै प्रान तज्यो, न जरयो सँग होलिका दाहन तैं॥

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  5. लोक की लाज औ सोच प्रलोक को - बोधा

    लोक की लाज औ सोच प्रलोक को, वारिये प्रीति के ऊपर दोऊ।गाँव को गेह को देह को नातो, सनेह मैं हाँ तो करै पुनि सोऊ ॥

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