धरती पर तारे...

Bhawani Prasad MishraBhawani Prasad Mishra29 Mar 1913 – 20 Feb 1983

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सारे के सारे
आसमान के तारे
टूट पड़े धरती के ऊपर
झर-झर-झर-झर अगर
तो बतलाओ क्या होगा?

धरती पर आकाश बिछेगा
किरणों से हर कदम सिंचेगा
चंदा तक चढ़ने का
मतलब नहीं बचेगा
रूस बढ़ा या अमरीका
बढ़ने का मतलब नहीं बचेगा 

मगर एक मुश्किल आऐगी
कब जाएगी रात और
दिन कब आएगा?
कब मुर्गा बोलेगा 
कब सूरज आएगा
कब बाज़ार भरेगा
कब हम जाएँगे सोने
कब जाएँगे लोग,
बढ़ेंगे कब किसान बोने
कब मां हमें उठाएगी
मूंह हाथ धुलेगा
जल्दी जल्दी भागेंगे हम यों कि
अभी स्कूल खुलेगा?

नाहक हैं सारे सवाल ये
हम सब चौबीसों घंटों
जागेंगे कूदेंगे खेलेंगे
हर तारे से बात करेंगे!

मगर दूसरे लोग-
बात उनकी क्या सोचें
उनसे कुछ भी नहीं बना
तो पापड़ बेलेंगे!
Bhawani Prasad Mishra
About the poet

Bhawani Prasad Mishra

Bhawani Prasad Mishra (29 March 1913 – 20 February 1983) was a Hindi poet and author. He was honoured with Sahitya Akademi Award in 1977 for his book Buni Hui Rassi. Born on 29 March 1913 in the village Tigaria of Hoshangabad district in erstwhile Central Pro…

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