Selected Quotes
Poetry & Stories
बुनी हुई रस्सी - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
व्यक्तिगत - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
त्रिकाल संध्या - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
शरीर कविता फसलें और फूल - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
कालजयी - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
भवानीप्रसाद मिश्र: Quick Answers
When was भवानीप्रसाद मिश्र born?
भवानीप्रसाद मिश्र was born on 29 September 1913. Associated place: मध्य प्रदेश, भारत.
When did भवानीप्रसाद मिश्र die?
भवानीप्रसाद मिश्र passed away on 20 September 1985.
Where can I read भवानीप्रसाद मिश्र's poetry?
Kavishala has 173 poems and stories by भवानीप्रसाद मिश्र, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by भवानीप्रसाद मिश्र
बुनी हुई रस्सी - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
व्यक्तिगत - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
त्रिकाल संध्या - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
शरीर कविता फसलें और फूल - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
कालजयी - भवानीप्रसाद मिश्र
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसे
चलो गीत गाओ, चलो गीत गाओ - भवानीप्रसाद मिश्र
चलो गीत गाओ, चलो गीत गाओ।कि गा - गा के दुनिया को सर पर उठाओ।
जंगल के राजा ! - भवानीप्रसाद मिश्र
जंगल के राजा, सावधान !ओ मेरे राजा, सावधान !
बूँद टपकी एक नभ से - भवानीप्रसाद मिश्र
बूँद टपकी एक नभ सेकिसी ने झुककर झरोखे से
निरापद कोई नहीं है - भवानीप्रसाद मिश्र
ना निरापद कोई नहीं हैन तुम, न मैं, न वे
पुकार कर - भवानीप्रसाद मिश्र
मुझे कोई हवा पुकार रही हैकि घर के बाहर निकलो
हो दोस्त या कि वह दुश्मन हो - भवानीप्रसाद मिश्र
हो दोस्त या कि वह दुश्मन हो,हो परिचित या परिचय विहीन
अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़ - भवानीप्रसाद मिश्र
अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़,दोनों मूरख, दोनों अक्खड़,
Selected Quotes by भवानीप्रसाद मिश्र (चुनिंदा उद्धरण)
बड़े प्यार से मिलना सबसेबड़े प्यार से मिलना सबसेबूँद टपकी एक नभ सेकिसी ने झुककर झरोखे सेहो दोस्त या कि वह दुश्मन हो,हो परिचित या परिचय विहीनजंगल के राजा, सावधान !ओ मेरे राजा, सावधान !अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़,दोनों मूरख, दोनों अक्खड़,चलो गीत गाओ, चलो गीत गाओ।कि गा - गा के दुनिया को सर पर उठाओ।Videos on भवानीप्रसाद मिश्र
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Books by भवानीप्रसाद मिश्र
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