छलक कर आई न पलकों पर विगत पहचान,
मुस्करा पाया न ओठों पर प्रणय का गान;
ज्यों जुड़ीं आँखें, मुड़ीं तुम, चल पड़ा मैं मूक—
इस मिलन से और भी पीड़ित हुए ये प्राण।
छलक कर आई न पलकों पर विगत पहचान,
मुस्करा पाया न ओठों पर प्रणय का गान;
ज्यों जुड़ीं आँखें, मुड़ीं तुम, चल पड़ा मैं मूक—
इस मिलन से और भी पीड़ित हुए ये प्राण।

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तार सप्तक’ के कवि। जन्म : 02/08/1919 | मथुरा, उत्तर प्रदेश निधन : 23/06/1975 | शिमला, हिमाचल प्रदेश ‘तार सप्तक’ के कवि भारतभूषण अग्रवाल का जन्म 3 अगस्त, 1919 को तुलसी-जयंती के दिन उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले के सतघड़ा मोहल्ले में हुआ। उन…
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सघन बर्फ़ की कड़ी पर्त-सीएक-एक कर अमित रूढ़ियाँ