आज़ादी का दिन मना,
नई ग़ुलामी बीच;
सूखी धरती, सूना अंबर,
मन-आंगन में कीच;
मन-आंगम में कीच,
कमल सारे मुरझाए;
एक-एक कर बुझे दीप,
अंधियारे छाए;
कह क़ैदी कबिराय
न अपना छोटा जी कर;
चीर निशा का वक्ष
पुनः चमकेगा दिनकर।
आज़ादी का दिन मना,
नई ग़ुलामी बीच;
सूखी धरती, सूना अंबर,
मन-आंगन में कीच;
मन-आंगम में कीच,
कमल सारे मुरझाए;
एक-एक कर बुझे दीप,
अंधियारे छाए;
कह क़ैदी कबिराय
न अपना छोटा जी कर;
चीर निशा का वक्ष
पुनः चमकेगा दिनकर।

Atal Bihari Vajpayee was an Indian politician, statesman and a poet who served three terms as the Prime Minister of India, first for a term of 13 days in 1996, then for a period of 13 months from 1998 to 1999, and finally, for a full term from 1999 to 2004. A…
View profile & all 18 Poems / Storiesउजियारे में, अंधकार में,कल कहार में, बीच धार में,
हरी हरी दूब परओस की बूंदे
टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वरपत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
पंद्रह अगस्त का दिन कहता:आज़ादी अभी अधूरी है।
बाधाएँ आती हैं आएँघिरें प्रलय की घोर घटाएँ,