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एकटा प्रेम-पत्रक मादे कविता - अरुणाभ सौरभ
हेयौ फुदन के पप्पाझरनाक बहैत पानि जकाँ
घमेनी कविता - अरुणाभ सौरभ
लिखू हमर कविकोनो एहन कविता
कोसी कछार पर - अरुणाभ सौरभ
वो बहती रहती हैहिलक लेकर
किसी और बहाने से - अरुणाभ सौरभ
1.मैंने तुमसे रात मांगी थी
गुलमोहर की छाँव - अरुणाभ सौरभ
सन्नाटे में साँसजैसे चलती हवाओं का स्वर
अरुणाभ सौरभ: Quick Answers
When was अरुणाभ सौरभ born?
अरुणाभ सौरभ was born on 9 September 1985. Associated place: चैनपुर, सहरसा, बिहार, भारत.
Where can I read अरुणाभ सौरभ's poetry?
Kavishala has 45 poems and stories by अरुणाभ सौरभ, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by अरुणाभ सौरभ
एकटा प्रेम-पत्रक मादे कविता - अरुणाभ सौरभ
हेयौ फुदन के पप्पाझरनाक बहैत पानि जकाँ
घमेनी कविता - अरुणाभ सौरभ
लिखू हमर कविकोनो एहन कविता
कोसी कछार पर - अरुणाभ सौरभ
वो बहती रहती हैहिलक लेकर
किसी और बहाने से - अरुणाभ सौरभ
1.मैंने तुमसे रात मांगी थी
गुलमोहर की छाँव - अरुणाभ सौरभ
सन्नाटे में साँसजैसे चलती हवाओं का स्वर
दुनिया बदलने तक - अरुणाभ सौरभ
लौट आओ पंछियों; किसूरज तुमसे कई झूठ-मूठ वादे करके
मैना के बहाने आत्मस्वीकारोक्ति - अरुणाभ सौरभ
पीली चोंच में हजारों साल का दंशह्रदय के कोने से चेंहाकर
लाल क़िला के इर्द-गिर्द - अरुणाभ सौरभ
अक्सर लाल क़िला जाता हूँहफ्ते मे एक रोज
चाय बगान की औरत - अरुणाभ सौरभ
उसे ये तो मालूम हैउसके नाज़ुक हाथों से तोड़ी गयी पत्तियों से
यह भरतनाट्यम का एक पोज नही है - अरुणाभ सौरभ
यह कविता प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखिका अरुंधति राय के लिए ,जो कहती हैं ,कि- ‘’मेरी दुनिया मर गई है / मैं उसका मर्सिया लिख रही हूँ ।”’जीशा भट्टाचार्य एक स्कूली छात्रा है ,जो मेरे स्कूल मे दसवीं मे पढ़ती है और भरतनाट्यम करती है उसकी माँ मुझे उसकी एक फ़ोटो देती है जिसमे जीशा अपनी उस बहन के साथ है जो चलने फिरने मे असमर्थ है। यह कविता जीशा के भरतनाट्यम और उसके जज्बे पर आधारित है......”’
लुक्का - अरुणाभ सौरभ
शाम की धुँधलकी के बादगहराता अन्धकार
राग यमन - अरुणाभ सौरभ
रात के पेट मेंधँस चुकी चान्दनी
Selected Quotes by अरुणाभ सौरभ (चुनिंदा उद्धरण)
वो बहती रहती हैहिलक लेकरलौट आओ पंछियों; किसूरज तुमसे कई झूठ-मूठ वादे करकेउसे ये तो मालूम हैउसके नाज़ुक हाथों से तोड़ी गयी पत्तियों सेसन्नाटे में साँसजैसे चलती हवाओं का स्वरहेयौ फुदन के पप्पाझरनाक बहैत पानि जकाँअक्सर लाल क़िला जाता हूँहफ्ते मे एक रोजVideos on अरुणाभ सौरभ
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