Selected Quotes
Poetry & Stories
ऐसौ बारौ बार याहि बाहरौ न जान दीजै - आलम
ऐसौ बारौ बार याहि बाहरौ न जान दीजै,बार गए बौरी तुम बनिता सँगन की ।
कँज की सी कोर नैना ओरनि अरुन भई - आलम
कँज की सी कोर नैना ओरनि अरुन भई,कीधौं चम्पी सींब चपलाई ठहराति है।
कछु न सुहात पै उदास परबस बास - आलम
कछु न सुहात पै उदास परबस बास,जाके बस जै तासों जीतहँ पै हारिये ।
कैधौं मोर सर तजि - आलम
कैधौं मोर सर तजि गए री अन्त भाजि,कैधौं उत दादुर न बोलत हैं,ए दई.
चन्द को चकोर देखै निसि दिन करै लेखै - आलम
चन्द को चकोर देखै निसि दिन करै लेखै,चन्द बिन दिन-दिन लागत अन्धियारी है ।
आलम: Quick Answers
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Poems & Stories by आलम
ऐसौ बारौ बार याहि बाहरौ न जान दीजै - आलम
ऐसौ बारौ बार याहि बाहरौ न जान दीजै,बार गए बौरी तुम बनिता सँगन की ।
कँज की सी कोर नैना ओरनि अरुन भई - आलम
कँज की सी कोर नैना ओरनि अरुन भई,कीधौं चम्पी सींब चपलाई ठहराति है।
कछु न सुहात पै उदास परबस बास - आलम
कछु न सुहात पै उदास परबस बास,जाके बस जै तासों जीतहँ पै हारिये ।
कैधौं मोर सर तजि - आलम
कैधौं मोर सर तजि गए री अन्त भाजि,कैधौं उत दादुर न बोलत हैं,ए दई.
चन्द को चकोर देखै निसि दिन करै लेखै - आलम
चन्द को चकोर देखै निसि दिन करै लेखै,चन्द बिन दिन-दिन लागत अन्धियारी है ।
चंद्रिका चकोर देखै निसि दिन करै लेखै - आलम
चंद्रिका चकोर देखै निसि दिन करै लेखै ,चंद बिन दिन दिन लागत अंधियारी है ।
चारोंदस भोन जाके रवा एक रेनु को सो - आलम
चारोंदस भोन जाके रवा एक रेनु को सो,सोई आजु रेनु लावै नन्द के अवास की ।
जसुदा के अजिर बिराजें मनमोहन जू - आलम
जसुदा के अजिर बिराजें मनमोहन जू,अँग रज लागै छबि छाजै सुरपाल की ।
जा थल कीन्हें बिहार अनेकन - आलम
जा थल कीन्हें बिहार अनेकन, ता थल काँकरी बैठि चुन्यो करैं।जा रसना सों करी बहु बातन, ता रसना सों चरित्र गुन्यो करैं।।
झीनी सी झँगूली बीच झीनो आँगु झलकतु - आलम
झीनी-सी झँगूली बीच झीनो आँगु झलकतु,झुमरि-झुमरि झुकि ज्यों क्यों झूलै पलना ।
ढौरी कौन लागी ढुरि जैबे की सिगरो दिन - आलम
ढौरी कौन लागी ढुरि जैबे की सिगरो दिन,छिनु न रहत घरै कहों का कन्हैया कों ।
दाने की न पानी की - आलम
दाने की न पानी की,न आवै सुध खाने की,याँ गली महबूब की अराम खुसखाना है.
Selected Quotes by आलम (चुनिंदा उद्धरण)
चंद्रिका चकोर देखै निसि दिन करै लेखै ,चंद बिन दिन दिन लागत अंधियारी है ।ऐसौ बारौ बार याहि बाहरौ न जान दीजै,बार गए बौरी तुम बनिता सँगन की ।कछु न सुहात पै उदास परबस बास,जाके बस जै तासों जीतहँ पै हारिये ।कैधौं मोर सर तजि गए री अन्त भाजि,कैधौं उत दादुर न बोलत हैं,ए दई.ढौरी कौन लागी ढुरि जैबे की सिगरो दिन,छिनु न रहत घरै कहों का कन्हैया कों ।कँज की सी कोर नैना ओरनि अरुन भई,कीधौं चम्पी सींब चपलाई ठहराति है।Videos on आलम
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