Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

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ज़ुल्फ़ Sher

5 sher

रुख़-ए-रौशन पे उस की गेसू-ए-शब-गूँ लटकते हैंक़यामत है मुसाफ़िर रास्ता दिन को भटकते हैं

भारतेंदु हरिश्चंद्र

कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थेकुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था

मुनव्वर राना

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तककौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

मिर्ज़ा ग़ालिब

अल्लाह-रे तेरे सिलसिला-ए-ज़ुल्फ़ की कशिशजाता है जी उधर ही खिंचा काएनात का

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

इक मिरा सर कि क़दम-बोसी की हसरत इस कोइक तिरी ज़ुल्फ़ कि क़दमों से लगी रहती है

मुबारक अज़ीमाबादी