Couplets · शेर
Every Sher, In One Place
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ज़ुल्फ़ Sher
5 sher
रुख़-ए-रौशन पे उस की गेसू-ए-शब-गूँ लटकते हैंक़यामत है मुसाफ़िर रास्ता दिन को भटकते हैं

कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थेकुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तककौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

अल्लाह-रे तेरे सिलसिला-ए-ज़ुल्फ़ की कशिशजाता है जी उधर ही खिंचा काएनात का

इक मिरा सर कि क़दम-बोसी की हसरत इस कोइक तिरी ज़ुल्फ़ कि क़दमों से लगी रहती है
