Couplets · शेर

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याद Sher

21 sher

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

बशीर बद्र

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलोधड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

Rahat Indori

तुम भूल कर भी याद नहीं करते हो कभीहम तो तुम्हारी याद में सब कुछ भुला चुके

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

तुम मिरे पास होते हो गोयाजब कोई दूसरा नहीं होता

मोमिन ख़ाँ मोमिन

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद हैहम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

हसरत मोहानी

ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हमजो याद न आए भूल के फिर ऐ हम-नफ़सो वो ख़्वाब हैं हम

शाद अज़ीमाबादी

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन कोक्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

Sahir Ludhianvi

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद होवही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो

मोमिन ख़ाँ मोमिन

नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आतीमगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं

हसरत मोहानी

हम फ़रामोश की फ़रामोशीऔर तुम याद उम्र भर भूले

मिर्ज़ा अज़फ़री

उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की यादवक़्त कितना क़ीमती है आज कल

Shakeel Badayuni

कुछ खटकता तो है पहलू में मिरे रह रह करअब ख़ुदा जाने तिरी याद है या दिल मेरा

जिगर मुरादाबादी

कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थेकुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था

मुनव्वर राना

'अमीर' अब हिचकियाँ आने लगी हैंकहीं मैं याद फ़रमाया गया हूँ

अमीर मीनाई

तुम्हारा नाम आया और हम तकने लगे रस्तातुम्हारी याद आई और खिड़की खोल दी हम ने

मुनव्वर राना

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बादयाद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

अमीर मीनाई

रुलाएगी मिरी याद उन को मुद्दतों साहबकरेंगे बज़्म में महसूस जब कमी मेरी

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहेन ख़ुदाई की हो परवा न ख़ुदा याद रहे

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता हैवो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिनबैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए

मिर्ज़ा ग़ालिब

यूँही दिल ने चाहा था रोना-रुलानातिरी याद तो बन गई इक बहाना

Sahir Ludhianvi